मंदिर परिसर में लोक-भक्ति गायन, नृत्य नाटिका की दी गई मनोहारी प्रस्तुतियां बालाघाट (ईएमएस). जिले के लांजी स्थित कोटेश्वर महादेव मंदिर परिसर में महादेव महोत्सव का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन बालाघाट के सहयोग से आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में शिव-शक्ति की विविध कलात्मक अभिव्यक्तियां एक मंच पर साकार हुईं। शिव विवाह से लेकर तांडव और मोक्ष तक की आध्यात्मिक यात्रा को लोक एवं शास्त्रीय प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत किया गया। पूरा मंदिर परिसर श्रद्धा, भक्ति और कला के सुरम्य संगम से आलोकित हो उठा। कार्यक्रम की शुरुआत छतरपुर के लोकगायक रामसिंह राय के मधुर लोकगायन से हुई। इसके बाद शिव शंकर दूल्हा बन आये, नोनी बनी बारात चलो देखने चलिए... गीत के माध्यम से शिव विवाह की रम्य छटा का सजीव चित्रण प्रस्तुत किया। दूल्हा आओ पैलू पैल बैल चढ़ के लांगुरिया.. और राई गीत कोटेश्वर महादेव आये शरण में तुम्हारी... ने लोकजीवन की चंचलता और श्रद्धा का सुंदर समावेश किया। अन्य गीतों के माध्यम से विवाहोत्सव की पारंपरिक रस्मों और लोकहास्य की झलक दिखाई गई। भोपाल की वीथिका मिस्त्री, उनके दल ने ओडिसी नृत्य पर आधारित नृत्य नाटिका प्रस्तुत कर शिव कथा को सजीव कर दिया। प्रस्तुति का आरंभ मंगलाचरण से हुआ, जिसमें लंकापति रावण द्वारा रचित शिव तांडव स्तोत्र जटाटवी गलज्जल प्रवाह पावितस्थलेज पर प्रभावशाली नृत्य संयोजन प्रस्तुत किया गया। दूसरी प्रस्तुति बोटु की रही, जो बट्टुकेश्वर भैरव को समर्पित शुद्ध नृत्य रचना है। इसमें ताल, लय और शारीरिक गतियों के माध्यम से मंदिर की मूर्तिकला और वाद्य यंत्रों की अभिव्यक्ति की गई। नाट्यशास्त्र की परंपरा के अनुसार शिव द्वारा तांडु को प्रदान किए गए नृत्य तत्वों की झलक इसमें दृष्टिगोचर हुई। अंतिम प्रस्तुति मोक्ष नृत्य की रही, जो देवी नारायणी स्वरूप पर आधारित थी। राग बागेश्री में प्रस्तुत इस नृत्य में साधना, समर्पण और ईश्वर में लीन होने की भावना को अभिव्यक्त किया गया। समारोह की अंतिम कड़ी में जबलपुर के गायक ईशान मिनोचा एवं उनके साथियों ने भक्ति गायन प्रस्तुत किया। गणेश वंदना से प्रस्ुतति प्रारंभ की गई। इस प्रकार कोटेश्वर धाम में आयोजित महादेव महोत्सव ने लोक परंपरा, शास्त्रीय नृत्य और भक्ति संगीत की त्रिवेणी के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक एकत्व का अद्भुत अनुभव कराया। भानेश साकुरे / 16 फरवरी 2026