शिवरात्रि पर डीजे के शोर से लोग हुए परेशान, कई जगह बनी विवाद की स्थिति छिंदवाड़ा (ईएमएस)। शिवरात्रि के भक्तिमय माहोल के बीच शहर में कई स्थानों पर डीजे के कानफोड़ू और जानलेवा शोर फिर कई जगह सुनाई दिए। प्रशासन द्वारा इनको बजाने के लिए नियम तय किए गए हैं लेकिन अधिकांश जगहों पर इन नियमों को धता बताते हुए आस्था के नाम पर यह अराजकता फैलती दिखी। तेज आवाज में इसके भौंडे प्रदर्शन को लेकर शहर में दो स्थानों पर खूनी विवाद भी हुए। शहर सार्वजनिक आयोजनों में डीजे की दहाड़, इससे होने वाली परेशानी और इसी बात पर होते गंभीर विवाद आयोजको की गुस्ताखियों के साथ प्रशासन की खामोशी और व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़ा कर रही है। सरकार ने ध्वनि प्रदूषण और खासकर डीजे जैसे ध्वनि विस्तारक यंत्रों की आवाज को लेकर लेकर स्पष्ट दिशा निर्देश बनाए हैं। जिला प्रशासन भी समय समय पर इन निर्देशों का पालन करने के निर्देश देता है। तय समय तक बजेने के साथ इनकी आवाज के लिए भी सीमित डेसीबल की सीमा तय है। शोभायात्रा, रैली जुलूसों में इसको लेकर सख्त निर्देश दिए जा चुके हैं लेकिन शहर में शिवरात्रि के दिन इन सभी नियमों की धज्जियां उड़ती दिखी। पातालेश्वर क्षेत्र में रात को आवासीय क्षेत्र में इसकी आवाज को लेकर हुए विवाद में सिरफुटव्वल के हालात बन गए। कई कालोनियों, मुहल्लों में भी दिनभर डीजे की झनझनाहट लोगों को बैचेन करती रही। बस स्टैंड में दोपहर चार बजे से शुरू हुआ डीजे रात दस बजे तक लोगों की धडक़ने बढ़ाता रहा और सिददर्द कराता रहा। खास बात यह कि आयोजन पुलिस कंट्रोल रूम के पास ही चलता रहा। नियम पहले से तय हैं और यदि इसका पालन लोग करते नहीं दिखे तो उन्हें मना क्यों नहीं किया गया। क्या यह आवाज अधिकारियेां को नहीं सुनाई दी। गणेशोत्सव और दुर्गाउत्सव के समय प्रशासन ने जो सख्ती दिखाई वह अब क्यूं नहीं दिखी। बोर्ड परीक्षाएँ चल रही हैं, बच्चे दिन-रात पढ़ाई में जुटे हैं। वे परेशान हुए।डीजे की तेज आवाज और उसकी झनझनाहट अच्छे खासे व्यक्ति को बीमार बना दें ऐसे में बीमार और बुजुर्गों के क्या हाल हुए होंगे। सवाल धर्म के नाम पर धमाचौकड़ी करने वाले ऐसे आयोजकों पर भी है। धार्मिक कार्यक्रमों की आड़ में यह उचक्कापन समाज में उनकी कोई अच्छी तस्वीर पेश नहीं कर रहा है। धार्मिक आयोजन अनुशासन और मर्यादा के प्रतीक होते हैं, शक्ति प्रदर्शन और हुड़दंग मचाने के लिए नहीं। ये इन्हें समझना होगा। शहर और शहर के लोग नियम कानून से चलते हैं सिर्फ दो दो वजहों से। एक आमव्यक्ति खुद ही समझदारी से नियमों का पालन करते दिखे या फिर काननू इतना कडक़ हो कि लोग उसे मानने पर मजबूर हों। छिंदवाड़ा में न तो ये समझदारी ऐसे आयोजनों के कर्ताधार्ताओं में दिख रही है न कानून का पालन कराने में प्रशासन दमदार दिख रहा है। ईएमएस/मोहने/ 16 फरवरी 2026