कल पेश होने वाले मध्यप्रदेश के बजट पर है सबकी निगाहें छिंदवाड़ा (ईएमएस)। मध्यप्रदेश का सालाना बजट सरकार बुधवार को ला रही है। हर साल की तरह इस साल के बजट पर भी सबकी निगाहें है। खासकर मध्यमवर्ग, नौकरीपेशा, महिलाएं, किसान और युवा वर्ग के लिए इस बजट में क्या मिलेगा इसका इंतजार सब कर रहे हैं। आमजनता और मध्यमवर्ग महंगाई से राहत की आस में है तो युवा रोजगार के अवसरों के इंतजार में हैं। महंगाई, टैक्स, रोजगार और किसानों की स्थिति आज भी लोगों की सबसे बड़ी चिंता है। जेब और उम्मीदों दोनों को राहत दे लोग ऐसा बजट चाहते हैं। व्यवसायों के मौके आसान बनाने की जरूरत श्रृंगार सामग्री की दुकान संचालक राजा ठाकुर का कहना है कि बजट में सरकार आंकड़ेबाजी न पेश कर और असली हालात तय करे। व्यवसायों को और आसान कैसे बनाया जाए इनके इच्छुकों के लिए सरकार इस पर प्लान बनाए। योजनाओं और सुविधाओं को फायदा आसानी से संबंधितों को मिले तो बजट का कोई मतलब और इसका लोगों को फायदा होगा। किचन का खर्च कम हो तो ही असली बजट हर साल बजट आता है राहत की बात की जाती है लेकिन किचन का बजट बढ़ता जा रहा है। रेाजमर्रा के जरूरी सामान महंगे होते जा रहे हैं। गृहणी संगीता पवार का कहना है कि गेहूं, चावल,दालें, तेल,घी,मसाले तो किसी बजट में सस्ते नहीं होते दिखते। इनसे गरीब से लेकर उच्च वर्ग तक संबंद्ध है। सामान्य-मध्यम वर्ग के लिए तो बजट कैसा रहा वह इसपर ही डिपेंड हो। सरकार यहंा विशेष ध्यान दे तो बेहतर रहेगा। स्वरोजगार के साथ नौकरियों पर भी हो ध्यान निजी महाविद्यालय से बीबीए कर रहे आयुश सिंह का कहना है कि सरकार स्वरोजगार को बढ़ावा देने की बात करती है लेकिन हर कोई व्यवसाय नहीं कर सकता। युवा पढ़ाई के बाद नौकरी का ख्वाहिशमंद है। उसे ये उपलब्ध कराई जाए। सरकारी विभागों में पद खत्म किए जा रहे हैं। युवा असमंजस में है भविष्य को लेकर। सरकार इसको इस मामले में गंभीर और ठोस उपाय करना चाहिए। परेशान किसान को राहत दिलाए सरकार किसान मक्का को लेकर इस साल जिस तरह परेशान दिखा वह स्थिति अन्य फसलों में भी आ सकती है। किसान का भरोसा जीतना पड़ेगा सरकार को। किसान राजेश पवार का कहना पड़ा कि यह किसान वर्ष है। मक्का ने किसानों को तोड़ दिया है। वह अगली फसल लगाने की स्थिति में नहीं है। सरकार को उसका भरोसा जीतना हेागा। ऐसी योजना हो कि उसकी लागत तो निकले। शिक्षा के क्षेत्र में और व्यवस्थाओं की दरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अभी भी जिले में बहुत कुछ जरूरतें है। इन सुविधओं की ओर ध्यान सरकार और जनप्रतिनिधियों को देना होगा। निजी कोचिंग संस्थान संचालक सुनीता शर्मा का कहना है कि जिलें में इंजीनियरिंग कालेज की जरूरत है। वर्तमान समय को देखते हुए डिजिटल एज्यूकेशन के लिए इंन्स्टीट्यूशन की यहां दरकार है। स्कूली विद्यार्थियों के भविष्य के लिए स्थानीय स्तर पर और संस्थान चाहिए। ईएमएस/मोहने/ 16 फरवरी 2026