कम ब्याज वाले लोन के जाल में फंसी जनता; विजयनगर पुलिस ने गिरोह को रिमांड पर लेकर शुरू की पूछताछ इंदौर (ईएमएस)। इंसान की मजबूरी और जल्द पैसा पाने की चाहत का फायदा अपराधी कैसे उठाते हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण इंदौर के विजयनगर स्थित शगुन आर्केड में देखने को मिला। यहाँ क्विकराईट फायनेंस के नाम से एक ऐसा मायाजाल बुना गया, जिसमें करीब 40 लोग फंस गए और अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई के 30 लाख रुपये गंवा बैठे। द मास्टरमाइंड : फिनबुल से फ्रॉड तक का सफर इस पूरी साजिश का सूत्रधार है शिवम तिवारी। शिवम कोई नौसिखिया अपराधी नहीं है, बल्कि वह फाइनेंस सेक्टर की बारीकियों को जानता था। पूर्व में फिनबुल माईक्रो फायनेंस कंपनी में काम करने के दौरान उसने लोन प्रक्रिया की हर उस कमजोरी को पहचान लिया था, जिसे ढाल बनाकर ठगी की जा सकती थी। उसने अपने साथ दो डमी डायरेक्टर (देवेन्द्र और विनय) जोड़े, जिन्हें महज 50-50 हजार रुपये का लालच देकर कंपनी के कागजों पर खड़ा कर दिया गया। मोडस ऑपरेंडी : 20% का वो घातक गणित अपराध का तरीका बेहद शातिर था। कंपनी ने प्रचार किया - नो गारंटर, नो सिक्योरिटी, सिर्फ आधार-पैन और तत्काल 5 लाख का लोन। जब जरूरतमंद लोग ऑफिस पहुँचते, तो उन्हें कम ब्याज दर का लालच दिया जाता। लोन अप्रूवल के बदले 20 प्रतिशत मार्जिन मनी एडवांस मांगी जाती। मैनेजर मिताली यादव रसीदें थमाती और पीड़ितों का भरोसा जीतती। जैसे ही 40 लोगों से करीब 30 लाख की राशि इकट्ठा हुई, पूरी की पूरी फायनेंस कंपनी रातों-रात धुएं की तरह गायब हो गई। क्राइम नोट : मैनेजर मिताली ने कुछ राशि अपने निजी बैंक खाते में भी ट्रांसफर करवाई थी, जो इस बात का सबूत है कि गिरोह को यकीन था कि वे कभी पकड़े नहीं जाएंगे। पुलिस रिमांड : अब शुरू होगा थर्ड डिग्री और डाटा का खेल विजयनगर थाना प्रभारी चंद्रकांत पटेल और उनकी टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर चारों आरोपियों को दबोच लिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वो 30 लाख रुपये कहाँ हैं? रिमांड के दौरान इन 3 सवालों के जवाब ढूंढेगी पुलिस : - मनी ट्रेल : क्या ठगी की रकम किसी प्रॉपर्टी या अय्याशी में उड़ाई गई या किसी गुप्त खाते में जमा है? - अंतरराज्यीय नेटवर्क : क्या हरदा, खंडवा और देपालपुर के इन आरोपियों ने अन्य शहरों में भी ऐसी शेल कंपनियां बना रखी हैं? - नेक्सस : क्या इस खेल में बैंक के किसी कर्मचारी या बाहरी एजेंट की मिलीभगत है? सावधान : क्राइम अलर्ट हम अपने पाठकों को सचेत करते है कि किसी भी गैर-पंजीकृत फाइनेंस कंपनी को एडवांस या मार्जिन मनी देने से बचें। आरबीआई की गाइडलाइन के अनुसार, कोई भी वैध कंपनी लोन देने से पहले नकद एडवांस की मांग नहीं करती। इंदौर पुलिस की सराहनीय टीम : उप निरीक्षक बलवीर सिंह रघुवंशी, श्रद्दा सिंह, प्रधान आरक्षक प्रमोद शर्मा, आरक्षक पार्थ, मोनू रघुवंशी व सायबर सेल। प्रकाश/17 फरवरी 2026