राज्य
18-Feb-2026


5 साल में श्रमिकों की संख्या घटी, कम घंटे काम, उसके बाद भी खर्च बढा भोपाल (ईएमएस)। केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर जीरामजी योजना कर दिया है। केंद्र सरकार ने स्वीकार किया था, मनरेगा योजना में राज्यों द्वारा भारी भ्रष्टाचार किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने केंद्र का अंशदान घटा दिया है। केंद्र सरकार अब 60 फीसदी राशि राज्य सरकार को देगी। 40 फ़ीसदी राशि राज्यों को मनरेगा में खर्च करनी पड़ेगी। पिछले 5 वर्षों में मनरेगा योजना में श्रमिकों की संख्या लगातार घट रही है। उन्हें पहले 100 दिन का काम मिलता था। अब घटकर 40 से 50 दिन के बीच में रह गया है। पिछले 5 वर्षों में श्रमिकों की संख्या 105.31 लाख से घटकर मात्र 56.08 लाख रह गई है। मनरेगा में कराए जा रहे कार्यों की संख्या भी घट गई है। उसके बाद भी मनरेगा का खर्च बढ़ता चला जा रहा है। मनरेगा योजना में मजदूरी के मद मे 4143 करोड रुपए से बढ़कर 6419 करोड रुपए हो गया है। मनरेगा योजना में अब काम भी कम हो रहे हैं। मजदूरों की संख्या भी घट गई है। उन्हें कम दिनों की मजदूरी मिली है। इसके बाद भी सरकार का खर्च बढ़ गया है। मनरेगा योजना में पंचायत स्तर पर भारी गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार प्राप्त होती ही हैं। पिछले 11 वर्षों में मात्र 2 एफआईआर कराई गई हैं। विभागीय स्तर पर 908 कर्मचारियों पर जुर्रमाने की दंडात्मक कार्रवाई कर उन्हें छोड़ दिया गया है। पिछले 11 वर्षों में 7 कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है। 6 कर्मचारियों का निलंबन हुआ है। केंद्र सरकार ने अंशदान घटा दिया है। इसके बाद आशंका व्यक्त की जा रही है। पिछले वर्षों में 11 लाख जॉब कार्ड निरस्त किए गए थे। अब केंद्र का अंशदान कम हो जाने से जीरामजी(मनरेगा) में मजदूरों को और कम मजदूरी मिलेगी। एसजे/ 18 फरवरी /2026