:: गेहूं की एमएसपी और किसान पेंशन पर सरकार ने फेरा पानी; बजट के खिलाफ प्रदेशव्यापी अभियान चलाएगी किसान सभा :: इंदौर (ईएमएस)। मध्य प्रदेश किसान सभा ने प्रदेश सरकार द्वारा पेश किए गए बजट को पूरी तरह किसान विरोधी घोषित किया है। संगठन का कहना है कि प्रदेश के अन्नदाताओं को उम्मीद थी कि सरकार गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2700 से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति क्विंटल करने के लिए बजट में विशेष प्रावधान करेगी, लेकिन सरकार ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। किसान सभा ने आरोप लगाया कि यह बजट ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ने वाला और किसानों की उम्मीदों पर पानी फेरने वाला है। मप्र किसान सभा के राज्य सचिव अरूण चौहान ने बजट की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें किसानों की पुरानी मांग किसान पेंशन का कोई जिक्र नहीं है। कृषि संकट और बढ़ती आत्महत्याओं के दौर में किसानों को कम से कम 5000 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि बजट में खाद की किल्लत दूर करने और बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने जैसे बुनियादी मुद्दों पर भी सरकार ने चुप्पी साध रखी है, जो बेहद निराशाजनक है। :: उत्पादन में गिरावट और परियोजनाओं पर चुप्पी :: अरूण चौहान के अनुसार आर्थिक सर्वेक्षण स्पष्ट बताते हैं कि प्रदेश में सरसों, दलहन और सोयाबीन का उत्पादन लगातार घट रहा है। इस गिरावट को रोकने और उत्पादन बढ़ाने के लिए बजट में किसी नई नीति या प्रोत्साहन राशि की चर्चा नहीं की गई है। इसके अतिरिक्त, अटल एक्सप्रेस-वे जैसी परियोजनाओं के नाम पर किसानों की बेदखली और उनकी समस्याओं को लेकर भी बजट में कोई ठोस समाधान पेश नहीं किया गया है। :: रोजगार के नाम पर ऊँट के मुँह में जीरा :: खेती के बाद प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी समस्या रोजगार की है, लेकिन बजट में नए रोजगार सृजन की कोई ठोस योजना नजर नहीं आती। कथित जी राम जी योजना के लिए आवंटित 10,428 करोड़ रुपये का बजट इस व्यापक परियोजना की आवश्यकताओं को देखते हुए ऊँट के मुँह में जीरा के समान है। आदिवासी क्षेत्रों के विकास और वहां की कल्याणकारी योजनाओं के लिए भी कोई नए प्रावधान नहीं किए गए हैं, जिससे ग्रामीण जनता में भारी असंतोष है। :: विश्वासघात के खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन का शंखनाद :: कुल मिलाकर किसान सभा ने इस बजट को ग्रामीण जनता और किसानों के साथ किया गया विश्वासघात करार दिया है। संगठन ने घोषणा की है कि इस किसान विरोधी बजट के खिलाफ वह चुप नहीं बैठेगा और जल्द ही पूरे प्रदेश में व्यापक जन-अभियान चलाकर सरकार की नीतियों का विरोध करेगा। किसान सभा ने मांग की है कि सरकार बजट की समीक्षा करे और किसानों की वाजिब मांगों को इसमें शामिल करे। प्रकाश/21 फरवरी 2026