23-Feb-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर एक रिट याचिका खारिज कर दी। याचिका में आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई एक सदस्यीय समिति को चुनौती दी गई थी। यह कमेटी तिरुमाला लड्डुओं के लिए कथित तौर पर मिलावटी घी की सप्लाई से जुड़े मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ सही विभागीय एक्शन के लिए बनाई गई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा की जा रही प्रशासनिक जांच और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच अलग-अलग दायरे में काम करती हैं। इसकारण दोनों प्रक्रियाएं साथ-साथ चल सकती हैं। स्वामी की याचिका में कहा गया था कि एक सदस्यीय समिति की जांच, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से गठित एसआईटी की जांच में दखल दे रही है। यह मामला तिरुपति मंदिर में प्रसाद के रूप में मिलने वाले लड्डुओं में इस्तेमाल हुए घी में मिलावट के आरोपों से जुड़ा है। याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि अदालत की चिंता सिर्फ इतनी है कि दोनों जांच प्रक्रियाओं में कोई टकराव न हो। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची भी शामिल थे। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास हस्तक्षेप की मांग करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। अपने आदेश में, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि दोनों प्रक्रिया कानून के अनुसार सख्ती से जारी रहें। सुनवाई के दौरान आंध्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि यह याचिका पूरी तरह दुर्भावना से दायर की गई है, ताकि विभागीय कार्रवाई को प्रभावित किया जा सके। तिरुपति मंदिर के लड्डू में कथित मिलावट के पीछे मुख्य लोगों की पहचान करने के लिए समिति बनाने का फैसला 3 फरवरी को मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में हुआ था। नायडू सरकार ने समिति को 45 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है। समिति यह देखेगी कि प्रशासनिक स्तर पर कहां चूक हुई, क्या फैसले नियमों के अनुसार और सावधानी से लिए गए थे, इस मामले में किन अधिकारियों की क्या जिम्मेदारी बनती है और उनके खिलाफ क्या अनुशासनात्मक या प्रशासनिक कार्रवाई होनी चाहिए। समिति का दायरा केवल प्रशासनिक पहलुओं तक सीमित रहेगा। इसके पहले 4 अक्टूबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने लड्डू में कथित मिलावट की जांच एक स्वतंत्र एसआईटी को सौंपी थी, जो केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक की निगरानी में काम कर रही थी। जांच पूरी होने के बाद सीबीआई की अगुवाई वाली एसआईटी ने 23 जनवरी 2026 को नेल्लोर स्थित एंटी करप्शन ब्यूरो की अदालत में अंतिम चार्जशीट दाखिल की। साथ ही कुछ अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की सिफारिश भी की। उधर, प्रवर्तन निदेशालय ने भी मामले में धन शोधन निवारण कानून के तहत मामला दर्ज किया है। एजेंसी ने सीबीआई की चार्जशीट के आधार पर जांच शुरू की है। सूत्रों के अनुसार, इसमें हवाला के दवारा लेनदेन के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि निजी डेयरी कंपनियों और बिचौलियों ने घी के टेंडर और गुणवत्ता मंजूरी से जुड़े टीटीडी अधिकारियों को प्रभावित करने के लिए हवाला चैनलों के माध्यम से रिश्वत पहुंचा दी। आशीष दुबे / 23 फरवरी 2026