-पत्नी संग नर्मदा परिक्रमा पर हैं निकले भोपाल,(ईएमएस)। मध्यप्रदेश के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी ओमप्रकाश श्रीवास्तव अपनी पत्नी के साथ 3300 किलोमीटर लंबी पैदल नर्मदा परिक्रमा पर निकले हैं। फरवरी 2025 में गृह सचिव पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने वैराग्य जीवन की ओर कदम बढ़ाते हुए पारंपरिक साधु वेश में यह आध्यात्मिक यात्रा शुरू की है। प्रशासनिक चकाचौंध से सीधे आध्यात्म की राह पर चलना किसी मिसाल से कम नहीं है। कहा जा रहा, कि रिटायर्ड आईएएस अधिकारी इस लोक को साधने और सुधारने के बाद अब उस लोक की चिंता में व्यस्त हैं, जहां देर-सबेर सभी को जाना है। दरअसल सेवानिवृत्त आईएएस ओमप्रकाश श्रीवास्तव अपनी पत्नी के साथ 10 दिसंबर 2025 को नर्मदापुरम के कोठी बाजार क्षेत्र से नर्मदा परिक्रमा का शुभारंभ किया। यह यात्रा मां नर्मदा के दक्षिण तट से प्रारंभ होकर समुद्र संगम तक और फिर उत्तर तट से वापसी की पारंपरिक परिक्रमा पद्धति के अनुसार की जा रही है। इसी क्रम में रविवार, 22 फरवरी 2026 को वे दक्षिण तट से खंभात की खाड़ी पार कर उत्तर तट की ओर बढ़ते हुए मंडलेश्वर स्थित नर्मदा आश्रय स्थल पहुंचे थे। दंपती प्रतिदिन लगभग 20 से 23 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर रहे हैं। वानप्रस्थ की ओर कदम यहां बताते चलें कि सेवानिवृत्त आईएएस अफसर ओमप्रकाश श्रीवास्तव राज्य शासन में कई प्रभावशाली पदों पर रह चुके हैं। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाकर आध्यात्मिक मार्ग अपनाने का निर्णय लिया। 3300 किलोमीटर की यह परिक्रमा वानप्रस्थ जीवन की भावना के तहत की जा रही है। दंपती साधु वेश में, सामान्य परिक्रमावासियों की तरह सादगीपूर्ण जीवन जीते हुए यात्रा कर रहे हैं। आध्यात्मिक बदलाव की मिसाल नर्मदा परिक्रमा को हिंदू परंपरा में अत्यंत कठिन और पुण्यदायी यात्रा माना जाता है। आमतौर पर यह यात्रा पैदल ही पूरी की जाती है और इसमें कई महीने लगते हैं। श्रीवास्तव दंपती का यह निर्णय उनके प्रशासनिक करियर के बाद आध्यात्मिक जीवन की ओर झुकाव को दर्शाता है। वहीं समाज में इसे एक प्रेरक पहल के रूप में देखा जा रहा है। हिदायत/ईएमएस 23फरवरी26