- अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर दिखा भाषाई इंद्रधनुष - मैथिली लोकगीतों से महका चिमनबाग मैदान; 18 से अधिक भाषाओं की प्रस्तुतियां बनीं आकर्षण का केंद्र :: इंदौर (ईएमएस)। शहर के चिमनबाग मैदान में आज मानो पूरा भारत सिमट आया था। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस समारोह में न केवल भाषाओं का मिलन हुआ, बल्कि मिथिला की लोक संस्कृति की खुशबू ने पूरे वातावरण को भावविभोर कर दिया। डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति एवं भारतीय भाषा संवर्द्धन समिति के इस मंच पर भाषाई विविधता का ऐसा जीवंत चित्र उभरा, जिसे देख हर कोई गदगद हो उठा। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण इंदौर सखी बहिनपा मैथिलानी समूह द्वारा प्रस्तुत मैथिली लोकगीत रहे। इन गीतों ने मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा की यादें ताजा कर दीं। साथ ही, मिथिला के पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉलों पर उमड़ी भीड़ ने यह दर्शाया कि संस्कृति का असली स्वाद उसकी परंपराओं में ही है। मंच पर मैथिल सामाजिक मंच के आदित्य नाथ झा, मुकेश झा और ऋतु झा जैसे उत्साही लोगों की सक्रिय उपस्थिति रही। समारोह की सबसे बड़ी खूबी इसका भाषाई समावेश था। यहाँ एक ओर जहाँ संस्कृत की गूंज थी, तो दूसरी ओर निमाड़ी और मालवी की मिठास। भीली की लोक-संस्कृति से लेकर पंजाबी की ओजस्विता, मराठी की गंभीरता, भोजपुरी का चुलबुलापन और दक्षिण की भाषाओं (मलयालम, तेलुगु, कन्नड़) का अनुशासन सब कुछ एक मंच पर एक सूत्र में पिरोया हुआ लग रहा था। मुख्य अतिथि एवं पीएचई विभाग के प्रमुख सचिव पी. नरहरि ने कहा, भाषा सिर्फ संवाद नहीं, बल्कि संस्कृति का डीएनए है। वहीं, विशेष अतिथि मेजर जनरल सरबजीत सिंह देऊसी ने इसे गौरवशाली बताया। मुख्य वक्ता प्रवीण गुप्त ने चेतावनी और परामर्श दोनों दिया - यदि हमने अपनी मातृभाषाओं को सहेजा नहीं, तो हम अपनी जड़ों से कट जाएंगे। भाषा संरक्षण ही राष्ट्र की असली सेवा है। प्रकाश/23 फरवरी 2025