बाघ मृत्यु संबंधी अपडेट वेबसाइट पर रहेंगे उपलब्ध भोपाल (ईएमएस)। मध्यप्रदेश में वन विभाग बाघों और उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। प्रदेश में प्राकृतिक एवं अप्राकृतिक कारणों से होने वाली बाघ मृत्यु की प्रत्येक घटना पर केंद्र सरकार के राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (नई दिल्ली) तथा मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक, मध्यप्रदेश द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप विधिवत कार्रवाई की जाती है संरक्षण प्रयासों में और अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए विभाग ने वर्ष 2025 एवं वर्ष 2026 (15 फरवरी तक) में घटित सभी बाघ मृत्यु प्रकरणों से संबंधित जानकारी आमजन की जानकारी के लिये विभागीय वेबसाइट पर अपलोड कर दी है। भविष्य में भी इस जानकारी को समय-समय पर अद्यतन किया जाएगा यह कदम पारदर्शिता को सुनिश्चुत करने के साथ ही ‘टाइगर स्टेट’ की गौरवपूर्ण पहचान को और अधिक सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। केन्द्र सरकार द्वारा कराए गए वर्ष 2022 के बाघ आकलन के अनुसार देश में कुल 3,682 बाघ हैं, जिनमें से सर्वाधिक 785 बाघ (एक वर्ष से अधिक आयु के) मध्यप्रदेश में पाए गए हैं। यह उपलब्धि केंद्र एवं राज्य सरकार तथा वन विभाग के दशकों से किए जा रहे सतत एवं वैज्ञानिक प्रयासों का परिणाम है अधिक संख्या में बाघ होने के कारण प्राकृतिक मृत्यु स्वाभाविक है। विभाग का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि मानव-निर्मित कारणों से होने वाली घटनाएँ न्यूनतम रहें। ऐसी कोई घटना सामने आती है तो संबंधित दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाती है। प्रदेश में बाघों के सुरक्षित और समृद्ध भविष्य के लिए सभी की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है। प्रसन्नता की बात है कि बाघ संरक्षण के इस महत्वपूर्ण अभियान में आमजन, वन्य जीव संरक्षण संस्थाओं और मीडिया का सहयोग सदैव प्राप्त होता रहा है। मध्यप्रदेश वन एवं वन्यजीव संपदा की दृष्टि से देश का अग्रणी प्रदेश है। प्रदेश का लगभग एक-तिहाई क्षेत्र वन से आच्छादित है और यहां देश में सर्वाधिक बाघ, तेंदुआ, वल्चर एवं घड़ियाल पाए जाते हैं। साथ ही, विश्व की पहली अंतर-महाद्वीपीय बड़े मांसाहारी प्रदेश में वर्तमान में 26 वन्यजीव अभयारण्य, 11 राष्ट्रीय उद्यान एवं 9 टाइगर रिजर्व संचालित हैं। यह समृद्ध जैव-विविधता मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट’ के रूप में विशिष्ट पहचान प्रदान करती है। धर्मेन्द्र, 23 फरवरी, 2026