:: इंदौर खंडपीठ में खुली 2,000 पन्नों की सर्वे रिपोर्ट; मार्च में होगी अगली सुनवाई, हिंदू और मुस्लिम पक्ष ने रखे अपने तर्क :: इंदौर (ईएमएस)। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने सोमवार को धार स्थित विवादित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर के मामले में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ल और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने सभी संबंधित पक्षों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा प्रस्तुत वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियाँ और सुझाव प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि एएसआई द्वारा सीलबंद लिफाफों में सौंपी गई रिपोर्ट अब खोली जा चुकी है और इसकी प्रतियां सभी पक्षों को उपलब्ध करा दी गई हैं। मामले की अगली सुनवाई अब 16 मार्च को निर्धारित की गई है। उल्लेखनीय है कि धार जिले में स्थित इस 11वीं सदी के स्मारक को हिंदू पक्ष वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमल मौला मस्जिद होने का दावा करता है। वर्तमान में यह परिसर एएसआई के संरक्षण में है। :: सर्वे में मिले सनातन धर्म से जुड़े प्रतीक और सिक्के :: हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के अधिवक्ता विनय जोशी ने मीडिया से चर्चा में बताया कि एएसआई ने 98 दिनों तक चले व्यापक वैज्ञानिक सर्वेक्षण के बाद 10 खंडों (वॉल़्यूम) में 2,000 से अधिक पृष्ठों की रिपोर्ट तैयार की है। जोशी के अनुसार, रिपोर्ट में परिसर के भीतर सिक्के, सनातन धर्म से संबंधित धार्मिक चिह्न और देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के साक्ष्य होने का विस्तृत विवरण दिया गया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसर की अंतिम प्रकृति और विधिक स्थिति का निर्णय न्यायालय द्वारा ही किया जाएगा। :: हस्तक्षेप याचिका और क्षेत्राधिकार पर बहस :: दूसरी ओर, कमल मौला मस्जिद में शुक्रवार की नमाज अदा करने वाले तीन व्यक्तियों की ओर से अधिवक्ता अशहर वारसी ने हाई कोर्ट में एक हस्तक्षेप याचिका दायर की है। वारसी ने तर्क दिया कि हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा उठाया गया मामला परिसर के तथ्यों से संबंधित है, जिसका परीक्षण सबसे पहले दीवानी न्यायालय (सिविल कोर्ट) में किया जाना चाहिए। उन्होंने दलील दी कि वर्तमान स्थिति में यह मामला उच्च न्यायालय में विचारणीय नहीं है। :: वर्तमान व्यवस्था : मंगलवार को पूजा, शुक्रवार को नमाज :: विवाद की संवेदनशीलता को देखते हुए एएसआई द्वारा अप्रैल 2023 में जारी आदेश के अनुसार वर्तमान में एक विशेष व्यवस्था लागू है। इसके तहत हिंदू पक्ष को प्रत्येक मंगलवार को परिसर में पूजा-अर्चना करने की अनुमति है, जबकि मुस्लिम समुदाय को प्रत्येक शुक्रवार को नमाज अदा करने का अधिकार दिया गया है। अब सभी की निगाहें 16 मार्च को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ एएसआई की रिपोर्ट पर आने वाली आपत्तियाँ केस की दिशा तय करेंगी। प्रकाश/23 फरवरी 2026