इन्दौर (ईएमएस) नवम् जिला न्यायाधीश विवेक कुमार चंदेल की कोर्ट ने 45 वर्ष पूर्व माता-पिता व परिवार को छोड़कर पत्नी के साथ गुजरात चले गये, बड़े पुत्र की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने रानीपुरा के विधवा माॅं के रहवासी मकान के बटवारे के लिए स्टे आर्डर मांगने की हिमाकत करते हुए 87 वर्षीय माता, 62 वर्षीय भाभी, अधेड़ भाई एवं अधेड़ 05 बहनों के विरूद्ध दावा प्रस्तुत किया था। एडवोकेट के.पी. माहेश्वरी के अनुसार प्रकरण कहानी संक्षेप में इस प्रकार हैं कि रानीपुरा, नई बागड़, इंदौर स्थित मकान को अपने पिता की संपत्ति बताते हुए 45 वर्ष बाद गुजरात छोटा उदयपुर निवासी आबिद खान ने यह दावा पेश किया था कि करोड़ों रूपयों की मार्केट वेल्यु के रानीपुरा, इंदौर के मकान में उसका हिस्सा है, इसलिए उसे आठवाॅं हिस्सा दिलाया जावे, क्योंकि उसके भाई-बहन और विधवा भाभी आपस में संगनमत हो गये है एवं उसका हक हड़पना चाहते है। किरायेदार से प्राप्त 50,000/-रूपयें किराये का अंश भी उसे दिलवाया जावे तथा म.नं.-35, रानीपुरा, इंदौर के तलघर, तल मंजिल व तीन मंजिला भवन को प्रतिवादीगण परिवर्तन नहीं करे और उसका कोई विक्रय, अंतरण या उस पर भार-बोझ ना करने का उसे स्टे आर्डर दिया जावे। वृद्ध माता ने अपनी विधवा बहू और छोटे पुत्र और पोते के साथ उपस्थित होकर न्यायालय को बताया कि जिस मकान में उसका बड़ा बेटा हिस्सा मांग रहा है, वह उसके पिताजी की पैतृक संपत्ति नहीं है, बल्कि उसके ससुर बख्तावर खान तथा जेठ इब्राहिम खान की सम्पत्ति विधवा माॅं को मिली है। वादी का दावा झूठा है, क्योंकि विधवा बतुलबी ने हकत्याग में प्राप्त संपत्ति वर्षों पूर्व अपनी बड़ी विधवा बहू हसीनाबी और छोटे पुत्र मोहम्मद सईद को रजिस्ट्री करवाकर सौंप दी है। कोर्ट ने फाईल के रिकार्ड में पाया कि गुजरात के वादी ने दावे के साथ कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किये है। इस वादी या उसकी कतिपय किसी भी बहन को इस संपत्ति में कोई हक या स्वत्व नहीं है, क्योंकि बहनों ने भी लेखी सहमति पत्र देकर विधवा माता के आदेश को स्वीकार किया है और इन सारे तथ्यों को प्रतिवादीगण ने अपने जवाब में 1940 की रजिस्ट्री, 1973 का बक्षीश पत्र और बहनों की सहमति के पत्र, हकत्याग के लेख सहित समस्त दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किये है। कोर्ट ने पाया कि वादी की आशंका स्वयं ही खण्डित हो चुकी है और उसका कोई सबूत भी नहीं है, इसलिए वादी के पक्ष में प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं है और सुविधा का संतुलन तथा अपूर्णीय क्षति का बिन्दु भी वादी के पक्ष में विद्यमान नहीं है। न्यायालय द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज सबूतों के आधार पर माॅं बतुलबी, भाभी हसीनाबी, भतीजा आरिफ व भाई सईद खान सहित बहनों के भी पक्ष में मामले में आदेश हुए हैं। प्रकरण में वृद्ध माता सहित प्रतिवादीगण की ओर से पैरवी अधिवक्ता के.पी. माहेश्वरी, प्रतीक माहेश्वरी, पवन तिवारी, अमृता सोनकर, पुनीत माहेश्वरी, सुनिल यादव, हरिओम पॅंवार, अनुराग कुशवाह, अर्जुन प्रजापति द्वारा की गई। आनंद पुरोहित/ 24 फरवरी 2026