भारत से लेकर दुनिया के सभी देशों में इस समय एआई की धूम मची हुई है। हर वर्ग का व्यक्ति छोटा हो या बड़ा इसी तकनीकी की बात कर रहा है। सबको ऐसा लग रहा है, यदि यह तकनीकी हमारे पास नहीं आई तो शायद हम अपना सब कुछ खो देंगे। भारत में हाल ही में एआई समिट हुआ है। जिसमें दुनिया भर के देशों से एआई की आईटी कंपनियों ने बड़े-बड़े दावे किए हैं। ऐसा लग रहा है, जल्द ही स्वर्ग धरती पर उतर आएगा। एआई तकनीकी आने के बाद जो खतरे आने वाले हैं, उसको लेकर कोई भी चर्चा नहीं हो रही है। दिल्ली में हुए समिट के दौरान कहा गया, इस तकनीकी से कारोबार आसान हो जाएगा। खेती बहुत बढ़िया हो जाएगी। एआई तकनीकी से इलाज होगा। इसे एआई क्रांति का नाम दिया जा रहा है। यह क्रांति आएगी, उसके बाद आदमी को कुछ नहीं करना पड़ेगा। इसे एक बड़ी औद्योगिक क्रांति के रूप में देखा जा रहा है। धरती में सभी को सब कुछ बैठे-बैठे मिल जाएगा। इस तरह की बातें कही जा रही हैं। एआई तकनीकी के दुष्प्रभाव को लेकर युवल नोआ हरारी ने अपनी किताब नेक्सस में एआई के खतरों से आगाह किया है। उन्होंने दावा किया है, पहली बार मनुष्य सभ्यता के सामने एक ऐसी मशीनी दुनिया खड़ी होने जा रही है जो मनुष्य से अधिक बुद्धिशील और पराक्रमी साबित होगी। इसका इस्तेमाल बहुत खतरनाक भी हो सकता है। एआई तकनीकी आने के बाद जिस तेजी के साथ मशीनें अपने आप को अपग्रेड कर लेती हैं। एक मशीन सैकड़ो और हजारों लोगों की क्षमताओं का काम अकेली कर सकती है। एआई सभी सूचनाओं, संवेदनाओं, कृत्रिम बादल और बरसात, कविता, उपन्यास, काल्पनिक कहानियां, टीवी सीरियल, शिक्षा एवं स्वास्थ्य से जुड़े कार्य, खेती से लेकर समुद्र तक इसकी पहुंच होगी। जिस तरीके के उपकरण एआई तकनीकी के माध्यम से बनाए जा रहे हैं, उसके कारण सबसे बड़ा खतरा बेरोजगारी का है। मशीनों पर आश्रित होकर हम अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमता को ही खो देंगे। इस तरह की बात सामने आने लगी है। एआई तकनीकी अब समाज के हर उसे क्षेत्र में घुसने के लिए तैयार खड़ी है, जहां पर अभी केवल मानव अस्तित्व ही काम करता था। अब जिस तरह के रोबोट बनाए जा रहे हैं, वह मानवों की तरह संवेदनशील और मानवों की तरह ही, वह सब कुछ कर सकते हैं, जो अभी तक मानव करते आए हैं। इस बात का भी खतरा उत्पन्न हो गया है, जो रोबोट बनाये जा रहे हैं। उसके बाद सेक्स और बच्चा पैदा करने का काम भी यही रोबोट करने लगेंगे। यह रोबोट मानवीय सभ्यता से ज्यादा संवेदनशील होंगे, एक दूसरे को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे। कुछ समय पहले स्मार्टफोन आया था। इस स्मार्टफोन ने लोगों की याददाश्त छीन ली। अब हर काम के लिए स्मार्टफोन की जरूरत होती है। कुछ याद नहीं रहता है, यदि स्मार्टफोन ना हो तो हम अपने परिजनों के मोबाइल नंबर और ईमेल अकाउंट का उपयोग भी नहीं कर पाते हैं। जब एआई का अस्तित्व अपने पूरे सवाब में आएगा, तब मनुष्य प्रजाति की कल्पना शक्ति और शारीरिक क्षमता सीमित करने का काम एआई क्रांति कर देगी। कहा जाता है, तकनीकी से डरने की जरूरत नहीं है। तकनीकी जीवन को बेहतर बनाने के लिए उपयोग में आती है। जिस तरह से सारे विश्व में छोटे-छोटे बच्चों से लेकर बड़े-बूढ़े तक स्मार्टफोन के नशे का शिकार होकर अपनी सुध-बुध खो चुके हैं। एआई क्रांति के माध्यम से जिस तरह से हम संपूर्ण जीवन को मशीनों के ऊपर आश्रित करते चले जा रहे है। ऐसी स्थिति में ना तो हम शारीरिक श्रम कर पाएंगे और ना ही हम मानसिक श्रम कर पाएंगे। इस स्थिति में भविष्य का क्या होगा, आसानी से समझा जा सकता है। तकनीकी का स्वागत किया जाना चाहिए, पर हमारे जीवन में तकनीकी का उतना ही प्रवेश होना चाहिए, जो हमारी सहायता और विकास को आगे बढ़ाने के लिए काम करे। जब करोड़ों लोगों का काम कुछ लाख मशीनें करने लगेंगी। हफ्तों और महीनो का काम पलक झपकते हो जाएगा। ऐसी स्थिति में 800 करोड लोगों को पालने-पोसने, सामाजिक और पारिवारिक जीवन को किस तरह से सुरक्षित एवं संरक्षित रखा जा सकेगा। तकनीकी का उपयोग करने के पहले इस पर गंभीर विचार-विमर्श करने की जरूरत है। ऐसा ना हो कि तकनीकी के सहारे हम विकास एवं सामाजिक सुरक्षा के स्थान पर विनाश की ओर आगे बढ़ जाएं। एआई तकनीकी का उपयोग बड़े सोच-समझकर स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार किया जाना चाहिये। ईएमएस / 26 फरवरी 26