जापानी रक्षा मंत्री शिंजिरो के ऐलान से राष्ट्रपति शी जिनपिंग की उड़ी नींद टोक्यो,(ईएमएस)। जापान और चीन के बीच समुद्र में छिड़ी ‘कोल्ड वॉर’ अब एक बहुत ही खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। जापान ने ड्रैगन को घेरने ऐसा मास्टरप्लान तैयार किया है, जिसने राष्ट्रपति शी जिनपिंग की नींद उड़ा दी है। जापान अब अपने सबसे पश्चिमी द्वीप योनागुनी को एक ‘मिसाइल बेस’ में बदलने जा रहा है। यह द्वीप ताइवान से महज 100 किलोमीटर दूर है, जिसका सीधा मतलब है कि अब जापान की मिसाइलें चीन की दहलीज पर तैनात होंगी। रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी के इस ऐलान ने चीन में खलबली मचा दी है, क्योंकि इसे चीन के ‘ताइवान मिशन’ के लिए सबसे बड़ा रोड़ा माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जापानी रक्षा मंत्री ने कहा है कि उनका देश पांच साल के अंदर ताइवान के पास एक छोटे से द्वीप पर मिसाइलें तैनात करेगा। इस कदम से चीन के साथ तनाव बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। कोइज़ुमी ने कहा कि जमीन-से-हवा में वार करने वाली मिसाइलें, जो एयरक्राफ्ट और बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम हैं, मार्च 2031 तक योनागुनी पर तैनात कर दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि इस काम की तेजी आगे जाकर पता चलेगी, लेकिन हम साल 2030 के लिए योजना बना रहे हैं। उन्होंने पहली बार तैनाती के शेड्यूल पर विस्तृत जानकारी दी। कोइज़ुमी ने यह ऐलान जापान की पीएम साने ताकाइची के ताइवान की सिक्योरिटी को लेकर टोक्यो और बीजिंग के बीच करीब ठप पड़े राजनियक रिश्तों के बीच किया है। ताकाइची ने पिछले साल सांसदों से कहा था कि अगर ताइवान को लेकर संघर्ष जापान के लिए खतरा बनता है, तो ताइवान पर चीन के हमले में उनका देश अपनी रक्षा की खातिर ठोस कदम उठाएगा। इसके बाद चीन ने काफी सख्त रवैया अपनाया था। बता दें बीजिंग ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और उस पर किसी भी तरह के बयान को चीन विरोधी बताता रहा है। जापान की डिफेंस मिनिस्ट्री ने 2022 में दूर के पश्चिमी द्वीपों पर सुरक्षा को मजबूत करने के प्लान की घोषणा की थी, साथ ही उसने अपना फोकस उत्तर में रूस से खतरों से हटाकर ईस्ट चाइना सी में चीनी सैन्य गतिविधियों का मुकाबला करने पर कर दिया है। योनागुनी जहां पहले से ही एक एसडीएफ फैसिलिटी है, ताइवान से 100 किमी दूर है और वहां के लोगों को डर है कि वे जल्द ही सैन्य टकराव में फंस सकते हैं। कोइज़ुमी नवंबर में द्वीप पर गए थे। उस दौरान उन्होंने कहा था कि मंत्रालय अगले हफ्ते योनागुनी के 1,500 लोगों को तैनाती के बारे में बताएगा। 2015 में यहां के लोगों ने 445 के मुकाबले 632 वोटों से एसडीएफ बेस बनाने के पक्ष में वोट किया था1 करीब 160 लोग एक पहाड़ की चोटी पर लगी रडार साइट्स के जरिए चौबीसों घंटे चीनी नेवी की हरकतों पर नजर रखते हैं। योनागुनी से करीब 150 किमी दूर खाली द्वीप पर जापान का दखल है, लेकिन चीन भी इस पर अपना दावा करता है; बीजिंग इन्हें दियाओयू के नाम से जानता है। सिराज/ईएमएस 26फरवरी26 ----------------------------------