नई दिल्ली,(ईएमएस)। दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि सशस्त्र बलों के कर्मियों की दिव्यांगता पेंशन सिर्फ यह कहकर रोकी नहीं जा सकती कि बीमारी “लाइफस्टाइल डिसऑर्डर” है या पीस एरिया (शांतिपूर्ण तैनाती) में हुई। हाईकोर्ट ने माना कि सेना में सेवा हर परिस्थिति में तनावपूर्ण होती है और इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। हाईकोर्ट में जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की डिवीजन बेंच ने आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (एएफटी) के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड अधिकारी की दिव्यांग पेंशन याचिका खारिज कर दी गई थी। याचिकाकर्ता उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) और कोरोनरी आर्टरी डिजीज से पीड़ित हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि यह मायने नहीं रखता कि बीमारी फील्ड एरिया में हुई या पीस पोस्टिंग में। असली सवाल यह है कि क्या बीमारी का संबंध सेवा परिस्थितियों से है। इस केस में मेडिकल बोर्ड यह स्पष्ट नहीं कर सका कि अफसर की बीमारियां सेवा से जुड़ी नहीं थीं। कोर्ट ने विशेष रूप से कहा कि बिना ठोस वजह के बीमारी को “लाइफस्टाइल डिसऑर्डर” कहना कानूनन सही नहीं। मेडिकल बोर्ड ने भी माना था कि बीमारियां अधिकारी की लापरवाही या गलत आदतों से नहीं हुई थीं। मोटापा, धूम्रपान या शराब से जुड़े तर्क खारिज कर दिए गए क्योंकि रिपोर्ट में इन्हें कारण नहीं बताया गया था। एएफटी द्वारा वजन और लाइफस्टाइल के आधार पर निष्कर्ष निकालना और हृदय रोग को सिर्फ पिछले 14 दिनों की ड्यूटी से जोड़ना भी तर्कसंगत नहीं माना गया। कोर्ट ने साफ किया कि बीमारी का मूल्यांकन पूरी सेवा अवधि और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर होना चाहिए। 40 साल की सेवा, 50 फीसद दिव्यांगता, अब पेंशन सुरक्षित याचिकाकर्ता अफसर ने वायुसेना में 40 साल से अधिक सेवा दी और ज्वाइनिंग के समय पूरी तरह से फिट थे। उन्हें 1999 में हाइपरटेंशन और 2016 में गंभीर कोरोनरी आर्टरी डिजीज हुई, जिसके लिए ओपन-हार्ट सर्जरी करानी पड़ी। उनकी दिव्यांगता 50 फीसद आंकी गई थी, लेकिन पेंशन रोक दी गई थी। हाईकोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए अफसर को 50 प्रतिशत आजीवन दिव्यांग पेंशन देने का निर्देश दिया। साथ ही रिटायरमेंट की तारीख से बकाया भुगतान 8 सप्ताह के भीतर जारी करने और देरी होने पर 12 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का आदेश भी दिया। हिदायत/ईएमएस 26फरवरी26