राज्य
26-Feb-2026


रेल टेक नीतिÓ से स्टार्टअप/नवोन्मेषकों को आसान मंच, जबकि ई-आरसीटीÓ से रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के मामलों का 24&7 ऑनलाइन निपटारा तेज होगा भोपाल (ईएमएस) । भारतीय रेल ने यात्रियों और आम नागरिकों को अधिक सुविधाजनक, पारदर्शी और आधुनिक सेवाएं देने की दिशा में दो महत्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं। इनमें पहला सुधार रेल टेक नीति के रूप में नवाचार और तकनीकी समाधान को बढ़ावा देने से जुड़ा है, जबकि दूसरा सुधार ई-आरसीटी के जरिए रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के मामलों की प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर सरल करने से संबंधित है। 1.रेल टेक नीति इस नई नीति का उद्देश्य नवोन्मेषकों, स्टार्टअप, उद्योग एवं संस्थानों को भारतीय रेल के साथ जोड़कर नवाचार को प्रोत्साहित करना है। नीति के तहत नवोन्मेषकों के चयन की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और नवाचार के लिए नया रेल टेक पोर्टल उपलब्ध कराया जाएगा। इसके माध्यम से कोई भी नवोन्मेषक या विभागीय उपयोगकर्ता इनोवेशन चैलेंजÓ शुरू कर सकेगा। इस नीति के तहत प्रस्ताव जमा करने की प्रक्रिया को एक ही चरण में विस्तृत रूप से प्रस्तुत करने योग्य बनाया गया है। साथ ही, समाधान को बड़े स्तर पर लागू करने हेतु मिलने वाला स्केल-अप ग्रांटÓ तीन गुना से अधिक बढ़ाया गया है तथा प्रोटोटाइप विकास और परीक्षण के लिए अधिकतम अनुदान भी दोगुना किया गया है। पोर्टल को उपयोगकर्ता-अनुकूल इंटरफेस के साथ तैयार किया गया है। नीति के अंतर्गत जिन प्रकार की नवाचार चुनौतियां दर्शाई गई हैं, उनमें एआई आधारित हाथी घुसपैठ पहचान प्रणाली, कोचों में एआई आधारित अग्नि पहचान प्रणाली, ड्रोन आधारित टूटी रेल पहचान, रेल तनाव निगरानी प्रणाली, पार्सल वैन में सेंसर आधारित भार गणना उपकरण, कोचों पर सौर पैनल, एआई आधारित कोच सफाई निगरानी तथा धुंध में बाधा पहचान जैसी तकनीकों को शामिल किया गया है। 2.ई-आरसीटी : रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल मामलों में डिजिटल सुधार दूसरा सुधार नागरिक-केंद्रित डिजिटल समाधान है, जिसका उद्देश्य रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के मामलों की प्रक्रिया को सरल, आधुनिक और पारदर्शी बनाना है। इस व्यवस्था के तहत देशभर की 23 रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल पीठों को डिजिटल रूप से जोड़ा जाएगा, जिससे कार्यप्रणाली अधिक दक्ष होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी। ई-आरसीटी के अंतर्गत कोई भी वादी/दावेदार कहीं से भी 24&7 ऑनलाइन ई-फाइलिंगÓ के माध्यम से अपना दावा दर्ज कर सकेगा। साथ ही केस इन्फॉर्मेशन सिस्टम के जरिए केस दर्ज होने से लेकर अंतिम निर्णय तक का केंद्रीकृत डिजिटल रिकॉर्ड बनेगा, जिसमें सुनवाई, साक्ष्य प्रस्तुतिकरण और स्थगन जैसी गतिविधियों की प्रगति भी ट्रैक की जा सकेगी। इसके अतिरिक्त डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से आदेशों और निर्णयों सहित सभी केस-संबंधित दस्तावेजों का डिजिटल केंद्रीकृत भंडारण किया जाएगा। इस नई व्यवस्था से दावों की ऑनलाइन फाइलिंग आसान होगी, सभी उपयोगकर्ताओं को स्वत: अलर्ट/सूचनाएं मिलेंगी, मामलों की संख्या की रियल-टाइम निगरानी से निपटारा तेज होगा तथा दस्तावेजों का स्वचालित प्रबंधन और पीठों को रियल-टाइम इनसाइट्स उपलब्ध होंगी। साथ ही, मामलों के प्रसंस्करण में एआई के उपयोग का भी प्रावधान बताया गया है। आशीष पाराशर/26फरवरी2026