अंतर्राष्ट्रीय
27-Feb-2026


कोलंबो,(ईएमएस)। श्रीलंका में 2019 के ईस्टर संडे बम धमाकों के मामले में पूर्व खुफिया प्रमुख मेजर जनरल सुरेश सैली की गिरफ्तारी ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। सैली को 25 फरवरी को गिरफ्तार किया गया, सैली पर आरोप है कि उन्होंने आतंकियों को मदद पहुँचाने और बम धमाकों की साजिश में भूमिका निभाई। इन धमाकों में 250 से अधिक लोग मारे गए थे, जिसमें स्थानीय कट्टरपंथी संगठन नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) और जमीयतुल मिलथु इब्राहिम शामिल थे। हमलावर इस्लामी कट्टरपंथ और आईएसआईएस की विचारधारा से प्रेरित थे। श्रीलंका में उस समय रानिल विक्रमसिंघ सरकार थी और बम धमाकों के बाद खुफिया विफलता को लेकर उनकी सरकार की तब भारी आलोचना हुई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने धमाकों से कई हफ्ते पहले ही श्रीलंकाई खुफिया एजेंसी को मास्टरमाइंड और संभावित टारगेट की जानकारी दी थी। बावजूद इसके कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। एक विदेशी डॉक्यूमेंट्री में दावा किया गया कि सैली ने गोटाबाया राजपक्षे की सरकार को लाभ पहुंचाने के लिए धमाकों को रोकने में विफल रहने का निर्णय लिया। सैली की गिरफ्तारी राजनीतिक विवादों में भी फंसती दिख रही है। कई श्रीलंकाई नेताओं का कहना है कि सैली को राजनीतिक मकसद से फंसाया गया है। पूर्व मंत्री अली साबरी ने सेना और खुफिया को परेशान करने वाला दिन बताया और सैली के योगदान को याद दिलाया, जिन्होंने एलटीटीई नेटवर्क खत्म करने और देश की सुरक्षा में जोखिम उठाया था। भारत के लिए यह मामला संवेदनशील है। भारतीय खुफिया एजेंसियों ने पहले से चेतावनी दी थी, और अगर साबित होता है कि सैली ने जानबूझकर इनपुट को नजरअंदाज किया, तब इससे भविष्य में दोनों देशों के बीच खुफिया सहयोग और भरोसे को गंभीर क्षति पहुँच सकती है। इसके अलावा, सैली पर तमिल समुदाय के खिलाफ हिंसा और युद्धकालीन सबूतों को दबाने के आरोप भी हैं, जिससे मामला और जटिल बन जाता है। सैली की गिरफ्तारी फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस के लिए पर्याप्त सबूतों के साथ हुई है और यह सुरक्षा, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खुफिया सहयोग की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण घटना है। यह केवल श्रीलंका की आंतरिक राजनीति को नहीं बल्कि भारत-श्रीलंका संबंधों में खुफिया भरोसे को भी प्रभावित कर सकती है, क्योंकि यह साबित करता है कि शीर्ष अधिकारी द्वारा साझा की गई जानकारी का गलत इस्तेमाल गंभीर परिणाम ला सकता है। सुरेश सैली की गिरफ्तारी भारत के लिए चिंता की बात क्यों है? भारत ने धमाकों से पहले श्रीलंका को कई बार इनपुट दिए थे और अगर सैली ने वाकई धमाकों को रोकने की कोशिश नहीं की तो भारत के लिए ये चिंता की है। अगर यह साबित होता है कि एक शीर्ष अधिकारी ने साझा की गई जानकारी का गलत इस्तेमाल किया। तब यह भविष्य में दो देशों के बीच खुफिया जानकारियों के आदान-प्रदान को लेकर भरोसे को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। इसके अलावा शैली का करियर तमिल समुदाय के खिलाफ गलत व्यवहार और युद्ध के समय के सबूतों को दबाने और मिटाने के आरोपों से अटा पड़ा है। 2016 में जब शैली मिलिट्री इंटेलिजेंस (डीएमाआई) के डायरेक्टर थे, तब जाफना पेनिनसुला में आवा गैंग नाम के एक ग्रुप ने जमकर हिंसा की थी। आलोचकों और कुछ जांचकर्ताओं का कहना है कि ये हिंसा सेना के इशारे पर ही की गई थी ताकि तमिलों को और प्रतिड़ित किया जाए। इसीलिए ये मामला काफी ज्यादा संवेदनशील है और निश्चित तौर पर भारतीय एजेंसियों की नजर इसपर होगी। आशीष दुबे / 27 फरवरी 2026