अंतर्राष्ट्रीय
27-Feb-2026


अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया वाशिंगटन (ईएमएस)। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका मध्य पूर्व में किसी लंबे और अंतहीन युद्ध का हिस्सा नहीं बनेगा। एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने उन आशंकाओं को खारिज कर दिया, जिसमें कहा जा रहा था कि अमेरिका क्षेत्र में एक और दीर्घकालिक सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ सकता है। वेंस ने कहा कि भले ही ट्रंप ईरान के विरुद्ध संभावित सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हों, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका वर्षों तक चलने वाले युद्ध में उलझ जाएगा। वेंस के अनुसार, ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना अमेरिकी नीति का प्रमुख उद्देश्य है। इसके लिए सैन्य कार्रवाई एक विकल्प हो सकता है, लेकिन कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि “हम सभी कूटनीतिक विकल्प को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि ईरान क्या कदम उठाता है।” उनका मानना है कि संभावित सैन्य कार्रवाई सीमित और उद्देश्यपूर्ण होगी, न कि लंबे समय तक चलने वाला व्यापक युद्ध। इस बीच जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता जारी है, हालांकि अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। मध्यस्थों का कहना है कि बातचीत अगले सप्ताह फिर शुरू होगी। क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य तैनाती बढ़ी हुई है, जिससे तनाव की स्थिति बनी हुई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वे ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को सत्ता से हटाने के विचार में रुचि रखते हैं, जिसे उन्होंने संभावित रूप से “सबसे अच्छी बात” बताया। 41 वर्षीय वेंस, जो इराक युद्ध में सेवा दे चुके पूर्व मरीन हैं, लंबे समय से विदेशी सैन्य हस्तक्षेपों को लेकर संशयपूर्ण रुख रखते रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि उनके विचारों में कोई बदलाव नहीं आया है। उनका कहना है कि अमेरिका को अतीत की गलतियों से सीख लेनी चाहिए और बिना स्पष्ट रणनीति के किसी नए क्षेत्रीय संघर्ष में नहीं कूदना चाहिए। उन्होंने कहा कि “हमें अतीत की गलतियों को दोहराने से बचना होगा और सतर्क रहना होगा।” मध्य पूर्व में अमेरिका की भूमिका और विशेष रूप से इजरायल के प्रति उसके रुख को लेकर अमेरिकी राजनीति में मतभेद बढ़ रहे हैं। वेंस का मानना है कि पार्टी के भीतर इजरायल के प्रति संदेह रखने वालों की आवाज भी सुनी जानी चाहिए, हालांकि वे इजरायल को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी मानते हैं। उनके अनुसार, यह बहस केवल वर्तमान के लिए नहीं बल्कि भविष्य की दक्षिणपंथी राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण है। उल्लेखनीय है कि 2003 में इराक पर आक्रमण के बाद से अमेरिका ने मध्य पूर्व में व्यापक सैन्य उपस्थिति बनाए रखी है। पिछले दो दशकों में विभिन्न प्रशासन एक और लंबे युद्ध से बचने के दबाव में रहे हैं। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर तनाव समय-समय पर बढ़ता-घटता रहा है। यूरोपीय मध्यस्थता सहित कूटनीतिक प्रयास लगातार जारी हैं ताकि तेहरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को सीमित किया जा सके और पहले से अस्थिर क्षेत्र में और अधिक तनाव को रोका जा सके। आशीष दुबे/ 27 फरवरी 2026