* राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने रासायनिक खेती के दुष्परिणाम गिनाए, प्राकृतिक खेती को बताया जन-आंदोलन * मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल का आह्वान – ‘पहला सुख निरोगी काया’, बैक टू बेसिक से ही स्वस्थ भविष्य * 8 लाख से अधिक किसानों ने अपनाई प्राकृतिक खेती, हर विधायक से एक ‘प्राकृतिक गाँव’ विकसित करने की अपील गांधीनगर (ईएमएस)| गुजरात विधानसभा में शुक्रवार को आयोजित प्राकृतिक कृषि परिसंवाद को संबोधित करते हुए राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने रासायनिक खेती के गंभीर परिणामों तथा प्राकृतिक खेती के फायदों के बारे में विस्तृत मार्गदर्शन दिया। राज्यपाल ने कहा कि प्राकृतिक खेती जैसे गंभीर विषय को आज विधानसभा में स्थान मिला है। यह आनंद की बात है। जैविक एवं प्राकृतिक खेती के बीच का अंतर बताते हुए उन्होंने कहा कि जैविक खेती में एक एकड़ के लिए 300 क्विंटल गोबर खाद की जरूरत पड़ती है। इसके विपरीत; प्राकृतिक खेती सूक्ष्म जीवों की खेती है। देसी गाय के एक ग्राम गोबर में 300 करोड़ से अधिक सूक्ष्म जीव होते हैं और गौमूत्र खनिजों का भंडार है। जीवामृत तथा घन जीवामृत द्वारा जमीन में केंचुओं और मित्र कीटकों की संख्या बढ़ती है, जो प्राकृतिक रूप से जमीन को उपजाऊ बनाते हैं। राज्यपाल ने चिंता व्यक्त की कि वर्षों पहले कैंसर, डाइबिटीज या हार्टअटैक जैसे रोगों की व्यापकता नहीं के बराबर थी, जबकि आज छोटे बच्चों में भी कैंसर पाया जाता है। उन्होंने उन रिसर्च रिपोर्ट्स का भी उल्लेख किया, जिनमें कहा गया है कि नवजात शिशु के लिए अमृत समान माता के दूध में भी अब यूरिया तथा कीटनाशक मिल रहे हैं। भारत में हरित क्रांति के समय देश की धरती का ऑर्गेनिक कार्बन 2 से 2.5 प्रतिशत था, जो आज घटकर 0.5 प्रतिशत से भी नीचे चला गया है। राज्यपाल ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि जिस जमीन का ऑर्गेनिक कार्बन 0.5 प्रतिशत से नीचे चला जाता है, वह जमीन बंजर कहलाती है। गुजरात में रासायनिक खेती वाली जमीन का ऑर्गेनिक कार्बन 0.5 प्रतिशत से नीचे पहुँच चुका है, जिसके परिणामस्वरूप जमीन कठोर हो जाने के कारण वर्षा जल जमीन में नहीं उतरता और बाढ़ की स्थिति पैदा होती है। राज्यपाल ने जोड़ा कि प्राकृतिक खेती में केंचुए जमीन में प्राकृतिक रूप से छिद्र बनाते हैं, जिसके चलते जमीन में वर्षा जल संग्रह होता है। राज्यपाल ने कहा कि यूरिया-डीएपी की सब्सिडी पर देश के करोड़ों रुपए बरबाद किए जाते हैं। यदि प्राकृतिक खेती अपनाई जाए, तो यह खर्च बच सकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में समग्र देश में राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन लागू हुआ है। राज्य सरकार के प्रयासों से गुजरात में हाल में 8 लाख से अधिक किसानों ने प्राकृतिक कृषि अपनाई है। राज्यपाल ने कहा कि यह जरूरी है कि किसान शुरुआत में अपने खेत के एक भाग में प्राकृतिक खेती करें। इसके अलावा; राज्यपाल ने विधानसभा के सभी सदस्यों का आह्वान किया कि वे अपने क्षेत्र के एक गाँव को ‘प्राकृतिक गाँव’ अवश्य बनाएँ। राज्यपाल ने जल, जमीन, पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य बचाने के लिए प्राकृतिक खेती को अनिवार्य बताते हुए कहा कि गुजरात सरकार के सहयोग से यह मिशन अब जन आंदोलन बन चुका है। यदि हमें आने वाली पीढ़ी को कैंसर जैसे घातक रोगों से बचाना है और किसानों की आय दुगुनी करनी है, तो प्राकृतिक खेती के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने प्राकृतिक खेती को आज के और आने वाले समय; दोनों की अनिवार्यता बताते हुए कहा कि ‘पहेलुं सुख ते जात निरोगी (पहला सुख निरोगी काया)’; इस परंपरागत उक्ति के लिए प्राकृतिक खेती तारणोपाय है। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए ‘बैक टु बेसिक’ मंत्र की भूमिका देते हुए जोड़ा कि प्रधानमंत्री ने इस मंत्र द्वारा केवल प्राकृतिक खेती के ही नहीं, बल्कि मानव जीवन के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक सभी स्रोतों के संवर्धन का मार्ग भी बताया है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री द्वारा पानी की समस्या के निवारण के लिए कैच दे रेन, ग्लोबल वॉर्मिंग की चुनौतियों से निपटने एवं ग्रीन कवर बढ़ाने के लिए एक पेड़ माँ के नाम और स्वस्थता के लिए रसायनमुक्त खेती के दिए गए अभियानों को व्यापक रूप से अपनाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुजरात में राज्यपाल आचार्य देवव्रतजी की प्रेरणा एवं सघन मार्गदर्शन से प्राकृतिक खेती के जन आंदोलन बनने पर हर्ष व्यक्त किया। पटेल ने प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों के इस कार्य को भावी पीढ़ी को स्वस्थ रखने का आत्मसंतोषपूर्ण कार्य बताया और विश्वास व्यक्त किया कि प्राकृतिक खेती का यह परिसंवाद अधिक से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर मुड़ने के लिए प्रेरित करेगा। इससे पहले गुजरात विधानसभा के अध्यक्ष शंकर चौधरी ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि जीवन जीने के लिए अत्यावश्यक हवा एवं पानी को शुद्ध रखने के लिए ‘प्राकृतिक कृषि’ को अधिक से अधिक प्राथमिकता देना आवश्यक है और राज्यपाल आचार्य देवव्रत गुजरात की जनता के लिए निरंतर संवेदनशीलतापूर्वक यह कार्य कर रहे हैं। चौधरी ने कहा कि गुजरात ने पूज्य महात्मा गांधी तथा सरदार साहब के नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया है, जबकि आज सुशासन से देश एवं विश्व को दिशा देने का कार्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह कर रहे हैं। विधानसभाध्यक्ष ने कहा कि राज्यपाल स्वयं गाँव-गाँव किसानों के बीच जाकर प्राकृतिक कृषि के फायदे बता रहे हैं। उन्होंने जोड़ा कि इस वर्ष गुजरात सरकार ने प्राकृतिक कृषि संबंधी बजट में भी बहुत बड़ी घोषणा की है। हमें प्रयास करना होगा कि यह कार्य केवल सरकार का न रहे, बल्कि विधानसभा के माध्यम से भी गुजरात के सुदूरवर्ती नागरिक तक पहुँचे। अंत में आभार व्यक्त करते हुए कृषि मंत्री जीतू वाघाणी ने कहा कि गुजरात विधानसभा में इस प्रकार के प्राकृतिक कृषि संबंधी परिसंवाद का आयोजन होना समग्र गुजरात के लिए गौरव की बात है। प्राकृतिक कृषि के ऋषि और गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रतजी ने इस परिसंवाद के माध्यम से सभी को बहुत सरल भाषा में प्राकृतिक कृषि संबंधी मार्गदर्शन प्रदान किया है। वाघाणी ने सदन के सभी सदस्यों से अनुरोध करते हुए कहा कि प्राकृतिक कृषि आज के समय में मानव जीवन के लिए सबसे संवेदनशील मुद्दा है। अतः सभी जन प्रतिनिधियों को भी अपने क्षेत्र में निजी रुचि लेकर प्राकृतिक कृषि के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना चाहिए। सतीश/27 फरवरी