ज़रा हटके
28-Feb-2026
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लंदन (ईएमएस)। ब्लड कैंसर हमेशा धीरे-धीरे शरीर पर असर डालता है। ब्लड कैंसर ल्यूकेमिया, लिंफोमा और मल्टीपल मायलोमा अक्सर बोन मैरो से शुरू होते हैं, जहां शरीर में खून बनाने वाली कोशिकाएं तैयार होती हैं। कैंसर विशेषज्ञ की माने तो ब्लड कैंसर की जल्दी पहचान उपचार की सफलता को काफी बढ़ा देती है। उन्होंने कहा कि यदि बीमारी को शुरुआती स्टेज में पकड़ लिया जाए तो उपचार आसान हो जाता है और ब्लड स्टेम सेल ट्रांसप्लांट जैसे आधुनिक इलाज बेहतरीन परिणाम दे सकते हैं। ब्लड कैंसर के शुरुआती संकेत अक्सर सामान्य थकान या कमजोरी की तरह दिखाई देते हैं, लेकिन इन्हें हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। लंबे समय तक कमजोरी रहना, बिना मेहनत के भी सांस फूलना या शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस होना एनीमिया का संकेत हो सकता है। यह इसलिए होता है क्योंकि शरीर पर्याप्त स्वस्थ रेड ब्लड सेल्स नहीं बना पाता। इसके साथ ही बार-बार बुखार आना, छोटा-सा संक्रमण गंभीर रूप लेना या बार-बार बीमार पड़ना यह दर्शाता है कि व्हाइट ब्लड सेल्स अपना काम ठीक से नहीं कर पा रहीं और इम्यून सिस्टम कमजोर हो रहा है। कुछ मरीजों में प्लेटलेट्स की कमी भी शुरुआती चेतावनी देती है। बिना वजह खून आना, हल्की चोट में भी त्वचा का अधिक नीला पड़ जाना या त्वचा पर लाल-बैंगनी धब्बे दिखना ल्यूकेमिया की तरफ संकेत कर सकता है। वहीं बिना किसी बदलती दिनचर्या के वजन कम होना, रात को पसीना आना, और गर्दन, बगल या जांघ में दर्द रहित गांठें बनना लिंफोमा का संकेत हो सकता है। पसलियों, रीढ़ या हड्डियों में लगातार दर्द महसूस होना मल्टीपल मायलोमा से जुड़ा लक्षण हो सकता है। चिकित्सकों के अनुसार, ब्लड स्टेम सेल ट्रांसप्लांट इस बीमारी के इलाज में आशा की नई किरण है। इस प्रक्रिया में खराब बोन मैरो को हटाकर स्वस्थ स्टेम सेल्स दिए जाते हैं, जिससे शरीर नया ब्लड और मजबूत इम्यून सिस्टम बनाता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि शरीर में कोई असामान्य बदलाव दिखाई दे, बार-बार संक्रमण हो, या ऊपर बताए गए लक्षण लगातार बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। सुदामा/ईएमएस 28 फरवरी 2026