ज़रा हटके
28-Feb-2026
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जिनेवा (ईएमएस)। दुनिया भर में लगभग 19 करोड़ महिलाएं एंडोमेट्रियोसिस नाम की गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। यह दावा किया है विश्व स्वास्थ्य संगठन ने। संगठन के अनुसार, प्रजनन आयु की हर 10 में से 1 महिला इस समस्या की शिकार है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी विडंबना यही है कि इसे अक्सर सामान्य पीरियड दर्द समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें गर्भाशय के अंदर मौजूद ऊतक शरीर के अन्य हिस्सों जैसे अंडाशय, आंत या कभी-कभी फेफड़ों तक फैलने लगते हैं। अगर समय रहते इसका पता न चले, तो यह असहनीय दर्द के साथ-साथ बांझपन का कारण भी बन सकता है। एंडोमेट्रियोसिस के 6 अनोखे और चौंकाने वाले लक्षण अक्सर महिलाओं को भ्रमित कर देते हैं। पहला लक्षण है पीरियड्स के दौरान कंधे में अचानक तेज दर्द, जो डायफ्राम या फेफड़ों के पास टिश्यू जमा होने का संकेत हो सकता है। दूसरा, पेट और पाचन संबंधी समस्याएं जैसे कब्ज, दस्त या पेट फूलना, जिसे लोग अक्सर गैस या खराब डाइजेशन समझ लेते हैं। तीसरा, बार-बार पेशाब आना या पेशाब के समय जलन जो सामान्यत: यूटीआई समझा जाता है, लेकिन पीरियड्स में यह बढ़ जाए तो यह एंडोमेट्रियोसिस का संकेत हो सकता है। इसके अलावा, महिलाओं में टांगों और जोड़ों में दर्द, खासकर कूल्हे से घुटने तक खिंचने वाला दर्द भी एक अहम लक्षण है। पांचवां लक्षण है क्रोनिक थकान, जिसमें भरपूर नींद के बावजूद शरीर में हमेशा भारीपन महसूस होता है। हार्मोनल थेरेपी, दर्दनाशक दवाएं और गंभीर मामलों में सर्जरी के जरिए अतिरिक्त टिश्यू हटाने का इलाज किया जाता है। वहीं सही डाइट, योग और जीवनशैली में बदलाव सूजन को कम करने में मदद करते हैं। अंत में, माइग्रेन और तेज सिरदर्द भी एक आम संकेत है, जो हार्मोनल बदलाव और आंतरिक घावों के चलते होता है। मौजूदा समय में एंडोमेट्रियोसिस का स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन शुरुआती पहचान से इसका प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है। सुदामा/ईएमएस 28 फरवरी 2026