नई दिल्ली(ईएमएस)। मिडिल ईस्ट में गहराते युद्ध के संकट और ईरान के खिलाफ इजरायल व अमेरिका की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बीच भारत ने शांति स्थापना के लिए सक्रिय कूटनीतिक प्रयास शुरू कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात कर युद्ध को तत्काल रोकने की अपील की है। शनिवार को शुरू हुई इस सैन्य कार्रवाई और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उपजे हालातों पर भारत ने गहरी चिंता व्यक्त की है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान परिस्थितियों में नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए और हिंसा का रास्ता छोड़कर संवाद के जरिए समाधान निकाला जाना चाहिए। इधर नई दिल्ली में, युद्ध के गंभीर वैश्विक और रणनीतिक परिणामों का आकलन करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इधर नई दिल्ली में, युद्ध के गंभीर वैश्विक और रणनीतिक परिणामों का आकलन करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित देश के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी शामिल हुए। बैठक में मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और युद्ध के कारण भारत की अर्थव्यवस्था व तेल आपूर्ति पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की समीक्षा की गई। इजरायल के साथ-साथ प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से भी विस्तृत चर्चा की। प्रधानमंत्री ने यूएई पर हुए हालिया हमलों की कड़ी निंदा करते हुए मुश्किल घड़ी में भारत की एकजुटता प्रकट की। इन हमलों में एक भारतीय नागरिक समेत 58 लोग घायल हुए हैं, जबकि तीन लोगों की जान चली गई है। प्रधानमंत्री ने यूएई में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वहां के प्रशासन का आभार जताया और क्षेत्रीय स्थिरता की आवश्यकता पर बल दिया। भारत का रुख साफ है कि वह तनाव कम करने और वैश्विक शांति बनाए रखने के हर प्रयास का समर्थन करता है। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो खाड़ी देशों से भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए आकस्मिक योजना तैयार रखी जाए। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ हुई इस मंत्रणा में भारत की सैन्य और कूटनीतिक तैयारियों का जायजा लिया गया। भारत का मानना है कि इस क्षेत्र में लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। वीरेंद्र/ईएमएस/02मार्च2026