मुंबई(ईएमएस)। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में स्थित शत्रु संपत्तियों की खरीद-बिक्री को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा फैसला लेते हुए इन पर स्टांप शुल्क माफ कर दिया है। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य ई-नीलामी के दौरान खरीदारों की भागीदारी को बढ़ाना और इन संपत्तियों के निपटान में आने वाली बाधाओं को दूर करना है। इस फैसले के बाद दक्षिण मुंबई के पॉश इलाके मलाबार हिल स्थित जिन्ना हाउस एक बार फिर सुर्खियों में है। 2,600 करोड़ रुपये की अनुमानित कीमत वाला यह बंगला कभी पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना का निवास था, जहाँ भारत के विभाजन की रूपरेखा तैयार की गई थी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अनुसार, इन संपत्तियों की नीलामी में पहले कम प्रतिक्रिया मिलती थी। स्टांप शुल्क माफी से खरीद लागत कम होगी, जिससे निवेशक आकर्षित होंगे। हालांकि, रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि इन संपत्तियों का एक हिस्सा सरकारी कार्यालयों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है, क्योंकि कई विभाग वर्तमान में किराए की इमारतों में चल रहे हैं। विशेषज्ञों का यह भी तर्क है कि जहाँ एक ओर ई-नीलामी से राजस्व बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर मानवीय पक्ष को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कई परिवार दशकों से इन इमारतों में रह रहे हैं। ऐसे में बिना किसी पुनर्वास नीति के केवल नीलामी पर ध्यान केंद्रित करने से कानूनी विवाद बढ़ सकते हैं। सरकार को राष्ट्रीय हित और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता है ताकि इन प्राइम लोकेशन पर स्थित जर्जर संपत्तियों का सही उपयोग हो सके। क्या है शत्रु संपत्ति और नया नियम? शत्रु संपत्तियां उन लोगों की हैं जो 1965 और 1971 के युद्धों के बाद भारत छोड़कर पाकिस्तान या चीन चले गए। शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 के तहत इन संपत्तियों का प्रबंधन भारत के लिए शत्रु संपत्ति संरक्षक करता है। 2017 के संशोधन के बाद केंद्र सरकार को इन संपत्तियों को बेचने का अधिकार मिला। महाराष्ट्र में कुल 428 ऐसी संपत्तियां हैं, जिनका बाजार मूल्य 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है। वर्तमान में मुंबई में 6 फीसदी स्टांप शुल्क लगता है, जिसे अब पहली पंजीकरण प्रक्रिया के लिए माफ कर दिया गया है। वीरेंद्र/ईएमएस/02मार्च2026