लेख
02-Mar-2026
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भारतीय शेयर बाजार में इजराइल-अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद, जिस तरह से सारी दुनिया में अफ़रा-तफरी का माहौल बना है, इसका सबसे ज्यादा असर शेयर बाजारों पर पड़ा है। इसमें भी सबसे ज्यादा असर भारतीय शेयर बाजार में हुआ है। बाजार खुलते ही 30 सेकंड के अंदर निवेशकों के लगभग 7.80 लाख करोड रुपए एक ही झटके में डूब गए। उसके बाद घरेलू संस्थागत निवेश को ने 2292.8 करोड़ रुपए की खरीददारी कर बाजार को गिरने से रोका। सोमवार को बाजार खुलते ही शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली देखने को मिली। 7536.4 करोड़ के शेयर विदेशी निवेशकों के बेचते ही भारतीय बाजार में कोहराम मच गया। शेयर बाजार की अस्थिरता से इंडेक्स 15 फ़ीसदी उछलकर 15.78 पर पहुंच गया। उसके बाद निवेशकों ने डूबने से बचने के लिए भारी बिकवाली शुरू कर दी। शेयर बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि की आशंका को देखते हुए सभी सेक्टर में भारी बिकवाली देखने को मिली। देखते ही देखते निफ़्टी 350 अंकों से ज्यादा का गोता लगाने के बाद देसी संस्थागत निवेशकों के कारण निवेशको की ऑक्सीजन लेने की स्थिति बनी। शेयर बाजार में शाम को कारोबार बंद होने के समय निफ़्टी 313 अंकों की गिरावट के साथ 24865 तथा मुंबई स्टॉक एक्सचेंज 1043 अंकों की गिरावट के साथ 80238 पर कारोबार कर रहा था। शेयर बाजार में गिरावट के लिए मुख्य रूप से इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरान पर जो हमला किया गया था, उस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु हो जाने के बाद दुनिया के कई देशों में हालात बिगड़ गए। ईरान ने प्रतिक्रिया स्वरूप पश्चिम एशिया के उन देशों पर हमला किया, जहां पर अमेरिकी सैन्य अड्डे थे। ईरान के हमले से अमेरिकी सैन्य अड्डों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। यह माना जाता था, अमेरिका के यह सबसे सुरक्षित सैन्य क्षेत्र हैं। ईरान के हमले से तेल उत्पादक देशों में बड़े पैमाने पर अफरा-तफरी मच गई है। कच्चे तेल के दाम में लगभग सात फ़ीसदी से अधिक की तेजी देखने को मिली। कच्चे तेल का भाव बढ़कर 82.5 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। ईरान ने होमुर्ज से समुद्री आवाजाही को बंद कर दिया। कच्चे तेल के एक जहाज ने जबरदस्ती निकालने की कोशिश की। उस पर मिसाइल से हमला कर उसे जला दिया गया। जिसके कारण तेल की आपूर्ति पूरी तरह से बंद हो गई है। सोमवार को दुनिया भर के सभी बाजारों में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में भारी इजाफा देखने को मिला है। दुनिया भर के सभी शेयर बाजारों में हड़कंप की स्थिति बनी। भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले तेजी के साथ गिरा। डॉलर इंडेक्स इस समय 97.9 पर है। इस गिरावट को रोकने के लिए रिजर्व बैंक कोई हस्तक्षेप कर सकता है। इसका इंतजार आयातक कर रहे हैं। युद्ध को लेकर तीसरे दिन जिस तरह से ईरान ने ताबड़-तोड़ हमले किये है, उससे यूरोप के देशों में हड़कंप की स्थिति देखने को मिल रही है। इस युद्ध में तीसरे दिन ही अमेरिका और इजरायल को भी तगड़ा झटका लगा है। उन्हें इतने कड़े प्रतिरोध की आशा ईरान से नहीं थी। भारत की आर्थिक स्थिति पर इस युद्ध का सबसे गंभीर असर पड़ने जा रहा है। भारत 90 प्रतिशत कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस आयात करता है। जिस तरह से इनकी सप्लाई बाधित हुई है, कच्चे तेल एवं प्राकृतिक गैस के दामों में तेजी आना शुरू हुई है। उसका बहुत बड़ा असर भारत की महंगाई, बेरोजगारी तथा अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है। इस युद्ध में भारत की भूमिका एक तरह से मूक दर्शक की तरह है। भारत के प्रधानमंत्री युद्ध शुरू होने के 1 दिन पहले इजरायल की यात्रा पर थे। इजराइल से भारत आने के साथ ही ईरान पर हमला शुरू हो गया था। भारत युद्ध में कोई भाग नहीं ले रहा है, इसके बाद भी भारत निष्पक्ष भूमिका में नहीं रह गया है। भविष्य में भारत को इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। अमेरिका रोजाना भारत को आंखें दिखा रहा है। वर्तमान में रूस और ईरान से भी भारत की दूरियाँ बढ़ गई हैं। आगे चलकर भारत को बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। शेयर बाजार की गिरावट यदि एक हफ्ते भी बनी रही तो भारतीय शेयर बाजार का भगवान ही मालिक होगा, ऐसा अर्थ विशेषज्ञ कहने लगे हैं। भारतीय अर्थ-व्यवस्था 1990 की स्थिति में पहुंचने के आसार बन गये हैं। ईएमएस / 02 मार्च 26