- ऑनलाईन सस्ता खरीद रहे या महंगा, यह जानने घूम रहे लोग जबलपुर, (ईएमएस)। होली से एक दिन पहले संस्कारधानी के प्रमुख बाजारों में रंग, गुलाल और पिचकारियों की चमक चरम पर है। जबलपुर के फुहारा, कमानिया, सदर, अधारताल, रांझी, राइट टाउन और गोरखपुर मार्केट में शाम होते-होते इतनी भीड़ उमड़ रही है कि पैदल निकलना भी मुश्किल हो रहा है। लेकिन इस भीड़-भाड़ के बीच व्यापारियों का कहना है कि इस बार बाजार की असली तस्वीर थोड़ी बदली हुई है। वजह है क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की बढ़ती पकड़। कारोबारियों के मुताबिक, गुलाल के छोटे पैकेट, पिचकारी, रंगीन गुब्बारे और मिठाई जैसी छोटी-मोटी खरीद का एक हिस्सा अब मोबाइल के जरिए घर पहुंच रहा है। ब्लिंक इट और अमेजन जैसे प्लेटफॉर्म सेम डे डिलीवरी और “10-20 मिनट डिलीवरी का विकल्प दे रहे हैं, जिससे कामकाजी परिवारों और युवाओं को सुविधा मिल रही है। कई ग्राहक बाजार में घूमने तो आ रहे हैं, लेकिन खरीद का बड़ा हिस्सा पहले ही ऑनलाइन कर चुके होते हैं। सराफा और सदर में बदला खरीद पैटर्न … गुरंदी, गलगला बाजार के एक थोक व्यापारी बताते हैं कि पहले ग्राहक थोक में रंग और पिचकारी खरीदते थे, जबकि अब छोटे पैक और सीमित मात्रा की मांग बढ़ गई है। उन्होंने कहा कई लोग बताते हैं कि बाकी सामान ऑनलाइन मंगा लिया है, सिर्फ बच्चों के लिए खास पिचकारी लेने और बाजार घुमने आए हैं। सदर बाजार में युवाओं की भीड़ जरूर दिख रही है, खासकर ट्रेंडी और हाई-प्रेशर पिचकारियों के स्टॉल पर। लेकिन दुकानदार मानते हैं कि औसत खरीद घट गई है। एक दुकानदार ने बताया लोग पहले मोबाइल पर कीमत देख लेते हैं, फिर यहां मोलभाव करते हैं और बहुत से तो पहले खरीद चुके हैं आनलाईन यहां सिर्फ यह देखने आए हैं की महंगा लिया या सस्ता लिया है। ऑनलाइन ऑर्गेनिक गुलाल की मांग … राइट टाउन और गोरखपुर मार्केट में इस बार ऑर्गेनिक और हर्बल गुलाल की मांग बढ़ी है। 20-30 प्रतिशत महंगे होने के बावजूद लोग ‘स्किन फ्रेंडली’ रंगों को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि व्यापारियों का कहना है कि यही उत्पाद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर डिस्काउंट के साथ उपलब्ध होने से प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। एक दुकानदार ने बताया, ऑनलाइन छूट और होम डिलीवरी की वजह से ग्राहक तुलना करके खरीद रहा है। हमें भी रेट एडजस्ट करने पड़ रहे हैं। चाइनीज बनाम लोकल… पिचकारी बाजार में इस बार लोकल और मेरठ-दिल्ली के उत्पाद ज्यादा दिख रहे हैं। महंगी चाइनीज पिचकारी की मांग में कमी आई है। व्यापारियों का मानना है कि ऑनलाइन सस्ते विकल्प उपलब्ध होने से ग्राहक ज्यादा कीमत देने से बच रहे हैं। डिजिटल तुलना ने खरीदारी का तरीका बदल दिया है। चार दिन पहले दुकान खाली हो जाती थी … सराफा में पिछले दस वर्षों से रंग बेच रहे रमेश साहू कहते हैं, पहले होली से तीन-चार दिन पहले दुकान खाली होने लगती थी। अब लोग मोबाइल से ऑर्डर कर लेते हैं। बाजार में भीड़ है, लेकिन पहले जैसा थोक में उठाव नहीं है। वे मुस्कुराते हुए जोड़ते हैं, फिर भी त्योहार की असली रौनक बाजार में ही है। बच्चे पिचकारी हाथ में लेकर ही खुश होते हैं, स्क्रीन देखकर नहीं। आखरी दिन की खरीददारी से उम्मीद.. जबलपुर में इस बार होली बाजार दो हिस्सों में बंटा नजर आ रहा है एक तरफ पारंपरिक बाजार की चहल-पहल, दूसरी तरफ मोबाइल स्क्रीन से हो रही त्वरित खरीदारी। व्यापारियों का मानना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का असर जरूर पड़ा है, लेकिन आखिरी दिन की खरीदारी अब भी बाजार की धड़कन बनाए हुए है। त्योहार का रंग बरकरार है, बस खरीदारी का अंदाज बदल गया है। सुनील साहू / शहबाज / 02 मार्च 2026