तेल अवीव और तेहरान में विध्वंसक हमलों के बाद तबाही, मिडिल ईस्ट में 17 देशों पर अटैक, ईरान में कुवैत में मचाया कोहराम, अमेरिका के कई फाइटर जेट मार गिराए, ईरान ने किया परमाणु ठिकानों पर अमेरिका-इजराइल के हमले का दावा महाविध्वंस की उलटी गिरती शुरू...परमाणु प्रलय की आहट तेल अवीव/तेहरान(ईएमएस)। इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष ने हाल ही में तेल अवीव, यरूशलम और तेहरान जैसे प्रमुख शहरों में विध्वंसक हमले देखे हैं। तेल अवीव पर ईरान ने क्लस्टर बमों और ड्रोन के साथ कई मिसाइलों से हमला किया, जिससे शहर में भारी तबाही हुई। वेस्ट बैंक के पास आसमान में भी मिसाइलें देखी गईं, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। जवाब में, इजराइल ने तेहरान में जवाबी कार्रवाई की। इजराइली फाइटर जेट्स ने ईरान के सरकारी टीवी (आईआरआईबी) के कार्यालय को पूरी तरह से तबाह कर दिया, जहां हमले के बाद धुआं और आग देखी गई। यरूशलम भी ईरानी मिसाइलों की चपेट में आया, जिससे कई इमारतें ध्वस्त हो गईं और इजराइल कुछ मिसाइलों को रोकने में नाकाम रहा। ईरान ने बड़ा दावा किया है कि अमेरिका और इजराइल ने उसके परमाणु ठिकानों पर हमला किया है। इससे परमाणु प्रलय की आहट सुनाई देने लगा है। इजराइल ने पहली बार आयरन बीम नाम की नए लेजर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया। इसकी मदद से हिज्बुल्लाह की तरफ से दागे गए रॉकेटों को हवा में ही रोक दिया गया। आयरन बीम एक ऐसी तकनीक है जो तेज लेजर बीम से रॉकेट और ड्रोन को मार गिराती है। जंग के कारण तेल अवीव और तेहरान में विध्वंसक हमलों के बाद तबाही मची हुई है। मिडिल ईस्ट में 17 देशों पर अटैक हुआ है। ईरान में कुवैत में कोहराम मचाया है और अमेरिका के कई फाइटर जेट मार गिराया है। अमेरिकी सेना के मुताबिक, कुवैत के एयरडिफेंस सिस्टम ने गलती से इन विमानों को दुश्मन समझकर निशाना बनाया। हादसे में सभी अमेरिकी पायलट सुरक्षित हैं। दूसरी तरफ ईरान ने साइप्रस में ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स के अक्रोटिरी बेस पर ड्रोन हमला किया है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रविवार देर रात हुए इस हमले में बेस को मामूली नुकसान पहुंचा, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। इसके जवाब में ब्रिटिश सेना कार्रवाई कर रही है। दरअसल, ब्रिटिश पीएम कीर स्टारमर ने ईरानी मिसाइल साइट्स पर हमले के लिए अमेरिका को इस बेस का इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी। ईरान के अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी आईएईए के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रोसी ने बताया कि ईरान समेत पश्चिम एशिया के कई देशों में सक्रिय परमाणु बिजली संयंत्र और रिसर्च रिएक्टर मौजूद हैं। संयुक्त अरब अमीरात में चार चालू परमाणु रिएक्टर हैं जबकि जॉर्डन और सीरिया में रिसर्च रिएक्टर काम कर रहे हैं। बहरीन, इराक, कुवैत, ओमान, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों में भी सैन्य तनाव बढ़ा है, जिससे पूरे क्षेत्र में परमाणु सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ गया है। नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी पर हमला हुआ यूएन परमाणु एजेंसी में ईरान के राजदूत ने कहा है कि अमेरिका और इजराइल के हवाई हमलों में ईरान की नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी को निशाना बनाया है। ईरान का कहना है कि यह एक न्यूक्लियर सेंटर है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी रहती है। वहीं संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निगरानी निकाय के प्रमुख राफेल ग्रॉसी का कहना है कि उनकी एजेंसी के पास इस बात का कोई संकेत नहीं है कि अमेरिका-इजरायल के हमलों में ईरान में स्थित किसी भी परमाणु प्रतिष्ठान को नुकसान पहुंचा है या उस पर हमला हुआ है। सऊदी अरब के सरकारी टीवी के मुताबिक, ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरामको कंपनी की रास तनूरा रिफाइनरी को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया है। यह रिफाइनरी दम्माम के पास स्थित है। पहले रक्षा मंत्रालय ने बताया था कि दो ड्रोन को मार गिराया गया था, लेकिन उनके मलबे गिरने से तेल रिफाइनरी में आग लग गई। साइप्रस में ब्रिटिश सैन्य अड्डे पर ड्रोन हमला ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, साइप्रस में स्थित ब्रिटिश सैन्य अड्डे पर संदिग्ध ड्रोन हमला हुआ है। इसके जवाब में ब्रिटिश सेना कार्रवाई कर रही है और इस घटना में किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, यह हमला आधी रात को आरएएफ अक्रोटिरी बेस पर हुआ। ईरान का 4 देशों में 6 अमेरिकी बेस पर हमला ईरान ने सोमवार को मिडिल-ईस्ट के 4 देशों में 6 अमेरिकी बेस पर हमला किया है। कुवैत में अमेरिका के कई फाइटर जेट क्रैश हो गए है। जेट हवा में गोल-गोल घूमने के थोड़ी देर बाद जमीन से टकरा गए। हालांकि, इसमें किसी मौत की नहीं हुई है। दूसरी ओर ईरान के टॉप नेशनल सिक्योरिटी अधिकारी अली लारीजानी ने सोमवार को कहा कि ईरान अमेरिका से कोई बातचीत नहीं करेगा। यह बयान उन खबरों के जवाब में आया है, जिनमें कहा गया था कि ईरान ने अमेरिका से फिर से बातचीत शुरू करने की कोशिश की है। ईरान में 555 की मौत, 740 घायल रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल ने मिलकर अब तक ईरान के 1000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं। इस दौरान शुरुआती 30 घंटे में 2000 से ज्यादा बम गिराए गए। इनमें अब तक 555 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 700 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 180 छात्राओं की मौत हो गई और 45 घायल हैं। 28 फरवरी को शुरू हुई इस लड़ाई के पहले दिन हुई बमबारी में ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे। इसके अलावा रविवार को 3 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। ईरानी राष्ट्रपति ने कार्यवाहक रक्षा मंत्री नियुक्त किया ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने रिवोल्यूशनरी गाड्र्स के जनरल माजिद एब्नेलरेजा को देश का कार्यवाहक रक्षा मंत्री नियुक्त किया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब हालिया इजराइल-अमेरिका हमलों में पूर्व रक्षा मंत्री की मौत हो गई थी। राष्ट्रपति के मीडिया उप प्रमुख मेहदी तबातबाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि राष्ट्रपति के आदेश से यह नियुक्ति की गई है। अमेरिकी तेल-गैस कंपनी ने प्रोडक्शन रोका अमेरिका की तेल-गैस कंपनी शेवरॉन ने बताया है कि इजराइल सरकार के कहने पर उसने लेवियाथन गैस फील्ड में गैस निकालने का काम कुछ समय के लिए रोक दिया है। यह गैस फील्ड इजराइल के समुद्र तट के पास है और देश के सबसे बड़े गैस स्रोतों में से एक है। कंपनी ने कहा कि उसके सभी प्लांट और कर्मचारी सुरक्षित हैं। शेवरॉन इजराइल के पास समुद्र में स्थित तामार गैस फील्ड को भी चलाती है। कतर में एनर्जी ठिकानों पर मिसाइल हमला कतर के रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि देश में दो मिसाइल हमलों में ऊर्जा से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। मंत्रालय के मुताबिक, एक मिसाइल ने मेसाईद एनर्जी प्लांट के वॉटर स्टोरेज टैंक को निशाना बनाया, जबकि दूसरी मिसाइल रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में स्थित कतर एनर्जी से संबद्ध एक ऊर्जा सुविधा पर गिरी। हमलों में किसी के घायल या मारे जाने की सूचना नहीं है। रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि हमले से हुई सभी क्षति और नुकसान का आकलन संबंधित अधिकारी कर रहे हैं और आधिकारिक बयान बाद में जारी किया जाएगा। ईरान के 2 खुफिया अधिकारियों को मारा इजराइल ने कहा है कि उसने ईरान के खुफिया मंत्रालय के 2 अधिकारियों को मार गिराया है। इजराइली रक्षा बल ने दावा किया कि सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर की गई एयर स्ट्राइक में सैयद यह्या हमीदी और जलाल पोर हुसैन को निशाना बनाया गया। हमीदी ‘इजराइल मामलों’ के डिप्टी मिनिस्टर थे और उन पर विदेशों में यहूदियों, पश्चिमी देशों के नागरिकों और ईरान विरोधी तत्वों के खिलाफ गतिविधियों का नेतृत्व करने का आरोप था। जलाल पोर हुसैन मंत्रालय के जासूसी डिवीजन के प्रमुख थे। विनोद उपाध्याय / 02 मार्च, 2026