अंतर्राष्ट्रीय
03-Mar-2026
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वॉशिंगटन (ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी सनक के चलते ईरान पर ताबड़तोड़ हमले कर दिए हैं। अब जानकारों के राय में ये हमला अमेरिका के लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद साबित होने वाला नहीं है। इस युद्ध के बीच अमेरिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसके हथियारों के भंडार का तेजी से खाली होना है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना के शीर्ष जनरलों ने राष्ट्रपति ट्रंप को चेतावनी दी है कि ईरान पर लंबे समय तक चलने वाले हमले अमेरिकी सैन्य संसाधनों पर भारी दबाव डाल सकते हैं। सबसे अधिक चिंता एयर-डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलों को लेकर है, जिनका उपयोग दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने के लिए किया जाता है। अमेरिका जितनी तेजी से ईरान की मिसाइल क्षमताओं को खत्म करने की कोशिश कर रहा है, उसे अपने ठिकानों की रक्षा के लिए उतनी ही बड़ी संख्या में इंटरसेप्टर दागने पड़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन मिसाइलों के खर्च होने की दर इनके उत्पादन की गति से कहीं अधिक है। पश्चिम एशिया के आसमान में उड़ती मिसाइलें और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पैदा हुए हालात किसी हॉलीवुड फिल्म की डरावनी पटकथा जैसे नजर आ रहे हैं। नेटफ्लिक्स की फिल्म ए हाउस ऑफ डायनामाइट में जिस तरह एक बेकाबू परमाणु मिसाइल को रोकने में अमेरिकी रक्षा तंत्र को विफल होते दिखाया गया है, आज के वास्तविक हालात तेजी से उसी अनिश्चितता की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वयं स्वीकार किया है कि ईरान के खिलाफ जारी इस युद्ध में अभी और अमेरिकी सैनिकों की जान जा सकती है। सैन्य विशेषज्ञों के बीच अब यह सबसे बड़ी आशंका है कि यदि टकराव और गहराया, तो इसका सीधा असर अमेरिकी मुख्य भूमि तक भी पहुंच सकता है।अमेरिकी रक्षा विभाग अपने हथियारों की कुल संख्या को बेहद गोपनीय रखता है, जिसे मैगजीन डेप्थ कहा जाता है। हालांकि, मध्य-पूर्व में तैनात अमेरिकी एयर-डिफेंस सिस्टम का जिस बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है, उससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि अमेरिका आखिर कब तक इस तनाव को झेल पाएगा। शनिवार को तेहरान और अन्य इलाकों में अमेरिकी व इजरायली हमलों ने ईरान के मिसाइल लॉन्चरों, ड्रोन अड्डों और शीर्ष सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि यूएस सेंट्रल कमांड का दावा है कि ज्यादातर ईरानी जवाबी हमलों को नाकाम कर दिया गया है, लेकिन टॉमहॉक जैसी मारक मिसाइलों का अत्यधिक उपयोग भविष्य के लिए खतरे की घंटी है। वीरेंद्र/ईएमएस 03 मार्च 2026