अंतर्राष्ट्रीय
03-Mar-2026
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वाशिंगटन,(ईएमएस)।पश्चिम एशिया में युद्ध की ज्वाला भड़क उठी है। अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है, जिसे अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया है। इस सैन्य कार्रवाई के तहत ईरान के नौसैनिक अड्डों, रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) के मुख्यालय और सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई के कार्यालय सहित कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के माध्यम से दावा किया है कि इस कार्रवाई में ईरानी नौसेना के नौ महत्वपूर्ण जहाजों को समुद्र में डुबो दिया गया है और उनका नौसेना मुख्यालय लगभग पूरी तरह नष्ट हो चुका है। इस ऑपरेशन में अमेरिका ने अपनी आधुनिकतम सैन्य तकनीक और मारक क्षमता का प्रदर्शन किया है। हमले के लिए बी-2 स्टील्थ बॉम्बर, एफ-35 और एफ -22 जैसे घातक लड़ाकू विमानों का उपयोग किया गया है। इसके अलावा आसमान से निगरानी और सटीक हमले के लिए एमक्यू-9 रीपर और लुकास जैसे ड्रोनों को तैनात किया गया है। समुद्र में परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमान वाहक पोत और गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर मोर्चा संभाले हुए हैं, जबकि सुरक्षा के लिए थाड और पैट्रियट जैसी इंटरसेप्टर मिसाइल प्रणालियों का जाल बिछाया गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ईरान के बचे हुए सैन्य पोत भी जल्द ही समुद्र की तलहटी में होंगे। इस भीषण सैन्य प्रहार और ईरान के शीर्ष नेतृत्व की मौत के बाद तेहरान के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिया है कि ईरान का संभावित नया नेतृत्व अब अमेरिका के साथ बातचीत की मेज पर आने को तैयार दिख रहा है। हालांकि, अधिकारी ने नए नेतृत्व की पहचान उजागर नहीं की है, लेकिन यह स्पष्ट किया है कि जब तक ठोस परिणाम नहीं निकलते, सैन्य अभियान बिना रुके जारी रहेगा। खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने भी एक साक्षात्कार में ईरान के नए नेतृत्व से बात करने की योजना की पुष्टि की है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि भारी सैन्य दबाव के बीच ईरान में सत्ता परिवर्तन और कूटनीतिक रास्तों की तलाश शुरू हो गई है। वीरेंद्र/ईएमएस 03 मार्च 2026