भोपाल (ईएमएस)। मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई आबकारी नीति के तहत शराब की दुकानों का आवंटन शुरू किया है। पहले चरण में प्रदेश के 55 जिलों में 1200 शराब की दुकानों के लिए ई-टेंडर बुलवाए हैं। इन दुकानों का आरक्षित मूल्य (रिजर्व प्राइज) 6322 करोड़ रुपए तय की गई है। तय की गई शराब की दुकानों के लिए सोमवार को टेंडर जमा होना था और शाम को 6 बजे टेंडर खोले जाना था, लेकिन इस दौरान भोपाल सहित प्रदेश के पांच जिलों नीमच, अलीराजपुर, अनूपपुर और मुरैना में एक भी टेंडर नहीं आया। भोपाल में 87 शराब की दुकानों की नीलामी के लिए 20 ग्रुप बनाए गए हैं। इनकी रिजर्व प्राइज 1431 करोड़ रुपए है। इन दुकानों के लिए सोमवार को एक भी टेंडर नहीं आया। ऐसी स्थिति अन्य चार जिलों की भी रही। भोपाल में एक भी टेंडर न आने की वजह भोपाल के ठेकेदारों ने यहां की दुकानों पर रुचि नहीं दिखाई। शराब दुकानों की नीलामी के तीन चरण किए गए हैं तय शराब की दुकानों की नीलामी के तीन चरण तय किए गए हैं। इसमें पहले चरण ई-टेंडर की प्रक्रिया 27 फरवरी को शुरू हुई थी। इसके तहत 2 मार्च को 2 बजे तक ई-टेंडर के लिए ऑन लाइन टेंडर लोड कर ऑफर सबमिट किया जाना था। भोपाल में इसके लिए 20 ग्रुप बनाए गए थे, लेकिन शाम को टेंडर खोले जाने तक एक भी टेंडर समिट नहीं हुआ। अगले यानी दूसरे चरण के टेंडर के टेंडर की प्रक्रिया मंगलवार को सुबह 10 बजे शुरू होगी, जो 5 मार्च को दोपहर 2 बजे तक चलेगी। उसी दिन शाम को 6 बजे के बाद ई-टेंडर खोले जाएंगे। तीसरे चरण में शराब की दुकानों की नीलामी के लिए 6 मार्च को सुबह 10 बजे से 7 मार्च 2 बजे तक ई-टेंडर के लिए आन लाइन आफर समिट होंगे और उसी दिन ई-टेंडर खोले जाने की प्रक्रिया शुरू होगी। प्रदेश में पिछले साल की तुलना में इस साल आरक्षित मूल्य में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। 55 जिलों के 926 समूहों की 3,553 दुकानों के लिए 18,591.37 करोड़ की रिजर्व प्राइस निर्धारित की गई है। नई नीति में बड़ा बदलाव... दुकानों को छोटे समूहों में बांट दिया है मोहन सरकार ने बड़े समूहों की मोनापाली खत्म करने के लिए दुकानों को छोटे समूहों में बांट दिया है। इससे किसी बड़े ग्रुप के पास ज्यादा दुकानों का नियंत्रण नहीं रहेगा। मौजूदा ठेकेदारों को सीधे नवीनीकरण की सुविधा समाप्त कर दी गई है, जिसका मतलब यह है कि अब इच्छुक ठेकेदार खुली प्रतिस्पर्धा से टेंडर प्रक्रिया में भाग ले सकते है। रिजर्व प्राइस के मामले में जबलपुर, उज्जैन, ग्वालियर, इंदौर और भोपाल शीर्ष पर हैं। इन जिलों में शराब दुकानों की कीमतें अन्य क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक रखी गई हैं, जो वहां की मांग और बाजार क्षमता को दर्शाती हैं। आशीष दुबे / 03 मार्च 2026