ज़रा हटके
08-Mar-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। गर्भाशय में किसी भी तरह की परेशानी आने पर सबसे पहले महिला की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। यही कारण है कि आयुर्वेद से लेकर आधुनिक विज्ञान तक, गर्भाशय की विशेष देखभाल पर जोर दिया गया है। गर्भाशय असंतुलन होने पर महिलाओं को थायरायड, मोटापा, अनियमित मासिक चक्र, सिस्ट और बांझपन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में नियमित रूप से गर्भाशय की देखभाल बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ सरल आदतें गर्भाशय को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सबसे पहला तरीका है सोने से पहले शांति और हल्की गर्मी का वातावरण। रात का समय शरीर की प्राकृतिक हीलिंग प्रक्रिया का समय होता है, जब शरीर टॉक्सिन निकालने का काम करता है। सोने से पहले कमरे की रोशनी हल्की रखें और मन व शरीर दोनों को शांत रखें। इस दौरान शरीर गर्भाशय सहित सभी महत्वपूर्ण अंगों की मरम्मत का काम सहजता से कर पाता है। इससे हॉर्मोन संतुलित रहते हैं और तनाव भी कम होता है। दूसरा तरीका है गर्माहट देना। मासिक धर्म के दौरान गर्भाशय स्वाभाविक रूप से संकुचन से गुजरता है और इसके सामान्य होने में समय लगता है। इस दौरान दर्द, सूजन और असहजता महसूस होती है। ऐसे में हफ्ते में दो बार पेट के निचले हिस्से पर गर्म पानी की बोतल से हल्की सिकाई बेहद लाभकारी होती है। इससे गर्भाशय की मांसपेशियों को आराम मिलता है, दर्द कम होता है और रक्त संचार बेहतर होता है। तीसरा तरीका है भोजन के बाद शरीर को शांत रखना। भोजन के बाद शरीर की ऊर्जा पाचन तंत्र और गर्भाशय की ओर निर्देशित होती है। इसलिए भोजन के बाद कुछ देर शांत बैठना, गहरी सांसें लेना और शरीर को रिलैक्स होने देना आवश्यक है। इससे गर्भाशय में जमा गंदगी और अपशिष्ट पदार्थ आसानी से निकलते हैं, और रक्त प्रवाह भी बेहतर होता है। इसके लिए भोजन के बाद वज्रासन में कुछ समय बैठना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। चौथा तरीका है पीठ के निचले हिस्से और पेल्विक एरिया की मसाज। बादाम या जैतून के तेल से सर्कुलर मोशन में रोजाना रात को हल्की मसाज करने से मांसपेशियों को आराम मिलता है और उस हिस्से में ब्ल्ड सर्कुलेशन बेहतर होता है। सुदामा/ईएमएस 08 मार्च 2026