वॉशिंगटन,(ईएमएस)। ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य गतिरोध क्या किसी बड़े समझौते की ओर बढ़ रहा है? बीते 24 घंटों के घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि बयानों में भले ही कड़वाहट और अहंकार की जंग दिख रही हो, लेकिन पर्दे के पीछे दोनों देश इस संकट से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे हैं। कूटनीतिक गलियारों में अब सवाल यह नहीं है कि बातचीत हो रही है या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि शांति का प्रस्ताव पहले किसने दिया। इस पूरे विवाद के केंद्र में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है, जिसे लेकर दोनों पक्षों के बीच दो कदम आगे और दो कदम पीछे चलने की रणनीति पर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने अमेरिका को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से पूरी तरह खोलने का प्रस्ताव दिया है। तेहरान इस बात से बखूबी वाकिफ है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भी कीमत पर इस मार्ग को खुलवाना चाहते हैं, क्योंकि वह यह वैश्विक बोझ नहीं उठा सकते कि उनके कार्यकाल में इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर ईरान का पूर्ण नियंत्रण हो जाए। हालांकि, इस प्रस्ताव के बदले ईरान ने क्या माँगा है, इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए दावा किया कि अमेरिका बातचीत के लिए दबाव बना रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईरान अमेरिका से मिले एक प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है। व्हाइट हाउस ने भी इस हलचल की पुष्टि कर दी है। प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी विशेष नेशनल सिक्योरिटी टीम के साथ ईरान के प्रस्ताव पर चर्चा की है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ट्रंप की रेडलाइन्स ईरान के लिए बहुत स्पष्ट हैं और उन पर कोई समझौता नहीं होगा। फिलहाल ट्रंप के सामने दो ही विकल्प हैं: या तो पिछले सप्ताह से रुकी हुई भारी बमबारी को फिर से शुरू किया जाए या कूटनीति को एक और मौका दिया जाए। ट्रंप एक व्यवसायी की तरह सोचते हैं, जिनके लिए युद्ध एक महंगा सौदा है, जबकि एक ऐतिहासिक शांति समझौता उनके राजनीतिक करियर की बड़ी जीत साबित हो सकता है। भले ही पिछली वार्ताएं बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हुई हों, लेकिन दोनों देशों की आंतरिक मजबूरियां उन्हें मेज पर वापस ला रही हैं। ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था को प्रतिबंधों से राहत चाहिए, जबकि अमेरिका एक और अंतहीन युद्ध में फंसने से बचना चाहता है। ऐसे में होर्मुज का खुलना ही वह चाबी साबित हो सकती है, जिससे शांति के बंद दरवाजे खुलेंगे। वीरेंद्र/ईएमएस 29 अप्रैल 2026