जयपुर (ईएमएस)। राजस्थान के बाड़मेर मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित किराडू मंदिर अपनी अनोखी वास्तुकला और समृद्ध इतिहास के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ की बारीक नक्काशी और संरचना आज भी आगंतुकों को आकर्षित करती है। अपने वीरान माहौल और सदियों पुरानी लोककथाओं के कारण, किराडू मंदिर को रहस्यों से भरा स्थान माना जाता है, जहाँ की हर मूर्ति खंडित अवस्था में है, जो पर्यटकों के लिए आश्चर्य का विषय बनी हुई है। थार रेगिस्तान के भीतर स्थित किराडू मंदिर 11वीं सदी की एक अद्भुत धरोहर माना जाता है। यह स्थल कभी परमार वंश के समय एक समृद्ध और विकसित नगर के रूप में जाना जाता था, लेकिन आज यह खंडहरों में तब्दील होकर रहस्यों से घिर चुका है। किराडू मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसके स्तंभों और दीवारों पर की गई बारीक और जटिल नक्काशी है, जो इसे एक खास पहचान देती है। इसी वजह से इसे राजस्थान का खजुराहो भी कहा जाता है, जहाँ हर पत्थर कला का एक जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। मंदिर परिसर में बनी मूर्तियां आज भले ही खंडित अवस्था में हों, लेकिन उनकी सुंदरता और शिल्पकला अब भी मंत्रमुग्ध कर देती है। ये मूर्तियां अपने भीतर एक समृद्ध इतिहास की झलक समेटे हुए हैं, और यहाँ आने वाले पर्यटक इस प्राचीन धरोहर के माध्यम से बीते समय की कला और संस्कृति से रूबरू होते हैं। मंदिर के भीतर की संरचना बेहद भव्य और आकर्षक है, जो उस समय की उन्नत वास्तुकला और उत्कृष्ट शिल्पकला को दर्शाती है। मंदिर का हर स्तंभ और दीवार मानो उस युग की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की कहानी बयां करती है। पत्थरों पर उकेरी गई बारीक कलाकारी आज भी कारीगरों की कुशलता का प्रमाण देती है। यह ऐतिहासिक स्थल बाड़मेर के पंच गौरव में भी शामिल है, जो इसकी महत्ता को और बढ़ाता है। पर्यटकों के लिए यह जगह इतिहास, कला और रहस्य का एक अनोखा संगम प्रस्तुत करती है। जैसे-जैसे सूरज ढलता है, किराडू मंदिर का माहौल पूरी तरह बदल जाता है। दिन की चहल-पहल की जगह शाम होते ही यहाँ एक गहरा सन्नाटा और रहस्यमयी वातावरण महसूस होने लगता है। दिनभर जहाँ पर्यटकों की आवाजाही रहती है, वहीं रात होते ही पूरा इलाका सुनसान हो जाता है। मंदिर परिसर में एक अलग ही शांति और रहस्य का अहसास होता है, जो लोगों को आकर्षित भी करता है और थोड़ा भयभीत भी करता है। यही वजह है कि किराडू को रहस्यों से भरी ऐतिहासिक जगह माना जाता है, जहाँ 11वीं सदी से यह खंडहर में तब्दील मंदिर आज भी उसी रूप में है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, सूर्यास्त के बाद किराडू मंदिर परिसर में रुकना शुभ नहीं माना जाता है। कहा जाता है कि इस स्थान से जुड़ी एक प्राचीन कथा के कारण लोग रात में यहाँ ठहरने से बचते हैं। मान्यता है कि एक साधु के श्राप से एक महिला पत्थर की बन गई थी, जिसके बाद से यह स्थान रहस्यमयी माना जाने लगा। इसी कारण आज भी लोग सूर्यास्त के बाद यहाँ रुकने से कतराते हैं। हालांकि, इन मान्यताओं के बावजूद, यह स्थल अपने इतिहास और वास्तुकला के लिए पर्यटकों को आकर्षित करता है। किराडू का मुख्य मंदिर भगवान सोमेश्वर महादेव को समर्पित है। कभी यहाँ नियमित पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियां होती थीं, लेकिन आज मंदिर परिसर में सन्नाटा पसरा रहता है। सुदामा/ईएमएस 29 अप्रैल 2026