- जागरूकता का संदेश देने के लिए जिले के ग्रामो और कस्बों में घूमा ‘‘बाल विवाह मुक्ति रथ’’ - बाल विवाह के खिलाफ तीन चरणों में चले अभियान में धर्मगुरुओं, छात्रों, पंचायतों व वैवाहिक समारोहों में सेवाएं देने वालों को जोड़ा - लोगों को दिलाई बाल विवाह के खिलाफ शपथ और दी कानूनी पहलुओं की जानकारी - बाल विवाह कानून की नजर में दंडनीय अपराध कोरबा (ईएमएस) भारत सरकार के केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर चले 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान के तहत जिले के ग्रामो व कस्बों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहे ‘‘बाल विवाह मुक्ति रथ’’ की यात्रा के समापन के अवसर पर एक कार्यक्रम में होलिस्टिक एक्शन रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट (हार्ड) ने कहा कि हमारे प्रयासों को मिली समर्थन से हम आश्वस्त हैं कि बाल विवाह मुक्त कोरबा और बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करने के बेहद करीब हैं। होलिस्टिक एक्शन रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट (हार्ड) बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए जमीन पर काम कर रहे 250 से भी ज्यादा नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फार चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है। कोरबा जिला मे बाल विवाह मुक्ति रथ का कोरबा लोक सभा क्षेत्र की सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत जी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। बाल विवाह मुक्ति रथ ने जिले में भ्रमण किया। यह रथ पंचायत एवं दुरस्थ ग्रामो तक पहुंचा और बड़ी संख्या में लोगों को बाल विवाह के खिलाफ अभियान से जोड़ा। ‘‘बाल विवाह मुक्त भारत’’ अभियान के साल भर पूरा होने के अवसर पर भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 4 दिसंबर, 2025 को देशव्यापी 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान का एलान किया था। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठनों ने इस अभियान की मोर्चे से अगुआई करते हुए देश के 439 जिलों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता का संदेश देने के लिए ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ निकाले। इस रथ ने जिले के तमाम ग्रामो और कस्बों में घूम-घूम कर लोगों को बाल विवाह के स्वास्थ्य, शिक्षा व आजीविका पर दुष्परिणामों से अवगत कराया और इसके कानूनी पहलुओं की जानकारी देते हुए समझाया कि बाल विवाह दंडनीय अपराध है। होलिस्टिक एक्शन रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट (हार्ड) के निदेशक सुशील शर्मा ने बाल विवाह के खिलाफ इस 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान और इसके तहत निकाले गए ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को परिवर्तनकारी बताते हुए कहा की “यह कोई प्रतीकात्मक यात्रा नहीं थी। यह पहियों पर बदलाव का संदेश था जिसे लोगों ने स्वीकार किया और सराहा। अब लगभग पूरी सभ्य दुनिया ने हमारी यह बात मान ली है कि बाल विवाह कोई सामाजिक कुप्रथा नहीं बल्कि विवाह की आड़ में बच्चों से बलात्कार है। यह एक अपराध है और कानूनन दंडनीय है। बाल विवाह किसी भी बच्ची के जीवन के पुष्पित-पल्लवित होने की संभावनाओं को ही खत्म कर देता है और बच्चियों को कुपोषण, अशिक्षा व गरीबी के दुष्चक्र में धकेल देता है।” तीन चरणों में चले इस अभियान के पहले चरण में शैक्षणिक संस्थानों व दूसरे चरण में धर्मगुरुओं को जोड़ा गया और उनसे अनुरोध किया गया कि वे विवाह संपन्न कराने से पूर्व आयु की जांच कर लें और बाल विवाह संपन्न कराने से इनकार करें। साथ ही, कैटरर्स, सजावट वालों, बैंक्वेट हाल मालिकों व विवाह में सेवाएं देने वाले बैंड वालों, घोड़ी वालों से संपर्क कर अनुरोध किया गया कि वे बाल विवाह में अपनी सेवाएं नहीं दें क्योंकि बाल विवाह में किसी भी रूप में शामिल होने या सहयोग देने पर उन्हें सजा हो सकती है। तीसरे चरण में जिले की पंचायतों में जागरूकता अभियान चलाया गया। 09 मार्च / मित्तल