क्षेत्रीय
09-Mar-2026
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- स्थानांतरण सेवा का सामान्य हिस्सा और नियोक्ता का अधिकार कि वह किसी कर्मचारी को कब, कहां और किस समय स्थानांतरित करें - हाईकोर्ट इन्दौर (ईएमएस) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस जय कुमार पिल्लई की कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के ट्रांसफर को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई उपरांत इस टिप्पणी के साथ उसे खारिज कर दिया कि स्थानांतरण सेवा का सामान्य हिस्सा है। यह नियोक्ता के अधिकार क्षेत्र में आता है कि वह किसी कर्मचारी को कब, कहां और किस समय स्थानांतरित करे। कोर्ट ने कहा कि स्थानांतरण मामलों में अदालत तभी हस्तक्षेप कर सकती है, जब आदेश किसी वैधानिक प्रावधान का उल्लंघन करता हो या स्पष्ट रूप से दुर्भावनापूर्ण हो। स्थानांतरण नीति केवल प्रशासनिक दिशा-निर्देश होते हैं और इनके उल्लंघन मात्र से कोई कर्मचारी अदालत में स्थानांतरण आदेश रद्द कराने का अधिकार प्राप्त नहीं कर लेता है। हाईकोर्ट में यह याचिका नीमच की एक प्राध्यापक द्वारा अपने स्थानांतरण शासकीय महाविद्यालय जीरन से शासकीय महाविद्यालय रामपुरा करने को देने के आदेश के विरुद्ध लगाई गई थी जिसमें यह तर्क दिया गया था कि उनका स्थानांतरण 14 माह के भीतर ही कर दिया गया, जो राज्य सरकार की स्थानांतरण नीति के विरुद्ध है। याचिका सुनवाई के दौरान शासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि स्थानांतरण प्रशासनिक आवश्यकता के तहत उसी जिले में किया गया है और इसमें किसी प्रकार की दुर्भावना नहीं है। जिसके बाद कोर्ट ने उक्त टिप्पणी के साथ याचिका निराकृत कर दी। आनंद पुरोहित/ 09 मार्च 2026