10-Mar-2026
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तेहरान (ईएमएस)। अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अपने नए सर्वोच्च नेता की घोषणा कर दी है। दिवंगत नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर बनाया गया है। इस घोषणा के साथ ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और विशेषज्ञ यह आकलन करने में जुट गए हैं कि नए नेतृत्व में ईरान की रणनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी। हालांकि उन्हे पावर ब्रोकर के रुप में देखा जाता है और कार्यशैली में अलग बताई जाती है। मोजतबा खामेनेई को अपेक्षाकृत मध्य-स्तरीय धर्मगुरु माना जाता है। उन्हें वर्ष 2022 में अयातुल्ला की उपाधि प्रदान की गई थी, जो ईरान में सर्वोच्च नेता बनने के लिए आवश्यक मानी जाती है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम उन्हें भविष्य के नेतृत्व के लिए तैयार करने का संकेत था। हालांकि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कोई प्रमुख औपचारिक सरकारी पद नहीं संभाला, लेकिन लंबे समय तक सर्वोच्च नेता के कार्यालय के भीतर उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सत्ता के गलियारों में उन्हें प्रभावशाली “पावर ब्रोकर” और “गेटकीपर” के रूप में देखा जाता रहा है। कहा जाता है कि वह नीतिगत फैसलों और राजनीतिक संतुलन को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। मोजतबा खामेनेई ने किशोरावस्था में ही ईरान-इराक युद्ध के दौरान संक्षिप्त रूप से भाग लिया था। बाद के वर्षों में उनकी पहचान धीरे-धीरे मजबूत होती गई, खासकर तब जब उनके पिता की सर्वोच्च नेता के रूप में स्थिति मजबूत हो गई थी। वर्ष 2019 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने उन पर प्रतिबंध लगाए थे और आरोप लगाया था कि वे बिना किसी औपचारिक पद के भी सत्ता के कई फैसलों में प्रभाव डालते हैं। बताया जा रहा है कि रमजान के महीने में अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद ईरान की सत्ता को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। लंबे समय से यह माना जा रहा था कि उनके संभावित उत्तराधिकारी के रूप में मोजतबा खामेनेई का नाम सबसे आगे है। सोमवार को औपचारिक घोषणा के साथ यह स्पष्ट हो गया कि अब देश की सर्वोच्च राजनीतिक और धार्मिक जिम्मेदारी वही संभालेंगे। सुरक्षा संस्थानों से करीबी संबंध विश्लेषकों के अनुसार मोजतबा खामेनेई की पहचान दो प्रमुख पहलुओं से जुड़ी रही है। पहला, ईरान की सुरक्षा व्यवस्था, विशेष रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के साथ उनके करीबी संबंध। दूसरा, सुधारवादी राजनीति और पश्चिमी देशों के साथ निकटता के प्रति उनका कड़ा विरोध। आलोचकों का मानना है कि 2009 के विवादित राष्ट्रपति चुनाव के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों को दबाने में भी उनकी भूमिका रही थी। भविष्य की नीति को लेकर अटकलें विशेषज्ञों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान की नीतियों में बड़े बदलाव की संभावना कम है। सुरक्षा संस्थानों का प्रभाव और मजबूत हो सकता है तथा घरेलू विरोध प्रदर्शनों के प्रति सख्त रुख अपनाया जा सकता है। विदेश नीति में भी पश्चिमी देशों के साथ बातचीत केवल रणनीतिक जरूरतों के आधार पर ही आगे बढ़ सकती है।विश्लेषकों का यह भी मानना है कि नए सर्वोच्च नेता अपने पिता की कठोर विदेश नीति को जारी रख सकते हैं। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि ईरान अमेरिकी दबाव के आगे झुकने के बजाय अपने रुख पर कायम रहने की कोशिश करेगा। वर्तमान परिस्थितियों में यह स्पष्ट है कि क्षेत्र में चल रहा तनाव जल्द कम होने के संकेत नहीं दे रहा है। वीरेंद्र/ईएमएस 10 मार्च 2026