अंतर्राष्ट्रीय
10-Mar-2026
...


क्राको,पोलैंड(ईएमएस)। कल्पना कीजिए एक ऐसे शहर की जहां की दीवारें कंक्रीट की नहीं बल्कि नमक के क्रिस्टल की बनी हैं, जहां के गिरजाघरों में झूमर कांच के नहीं बल्कि पारदर्शी नमक के पत्थरों से तराशे गए हैं। पोलैंड के क्राको शहर के पास स्थित विएलिचका साल्ट माइन कोई काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि मानव श्रम और प्रकृति के अद्भुत मिलन की एक जीती-जागती मिसाल है। नमक का शहर के नाम से मशहूर यह स्थान 13वीं शताब्दी से अस्तित्व में है, जब नमक को सफेद सोना माना जाता था। धरती की सतह से लगभग 1000 फीट नीचे बसी यह समानांतर दुनिया 287 किलोमीटर लंबी सुरंगों के जाल में फैली है। लकड़ी की करीब 800 सीढ़ियां उतरने के बाद पर्यटक एक ऐसे साम्राज्य में कदम रखते हैं जो नौ स्तरों में बंटा है। इस विशाल भूमिगत शहर का वैभव इतना अधिक है कि एक सामान्य पर्यटक अपनी पूरी जिंदगी में इसका केवल दो प्रतिशत हिस्सा ही देख पाता है। यहाँ का सबसे मुख्य आकर्षण चैपल ऑफ सेंट किंग है, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा भूमिगत पूजा स्थल माना जाता है। इस गिरजाघर की फर्श की टाइल्स से लेकर वेदी तक, सब कुछ नमक की चट्टानों को काटकर बनाया गया है। यहाँ तक कि दीवारों पर लियोनार्डो दा विंची की प्रसिद्ध पेंटिंग द लास्ट सपर को भी नमक पर उकेरा गया है। इस शहर के भीतर मौजूद खारी झीलें डेड सी की याद दिलाती हैं, जहाँ पानी का घनत्व इतना अधिक है कि कोई भी आसानी से तैर सकता है। विएलिचका केवल पर्यटन स्थल ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी एक संजीवनी है। यहाँ की हवा सूक्ष्म नमक के कणों से युक्त और बैक्टीरिया मुक्त होती है, जिसे हैलोथैरेपी कहा जाता है। अस्थमा और श्वसन रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए यहाँ एक भूमिगत सेनेटोरियम बनाया गया है, जहाँ लोग फेफड़ों की सफाई के लिए घंटों बिताते हैं। हैरानी की बात यह है कि इस अद्भुत कलाकृति का निर्माण किसी बड़े इंजीनियर ने नहीं, बल्कि सदियों पहले यहाँ काम करने वाले साधारण खनिकों ने अपनी आस्था और खाली समय में किया था। उन्होंने नमक के पत्थरों से संतों, बौनों और दानवों की ऐसी मूर्तियां बनाईं कि आज यह यूयूनेस्को की विश्व धरोहर का हिस्सा है। आज यहाँ आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध हैं, जिनमें 125 मीटर नीचे स्थित रेस्टोरेंट और संगीत कार्यक्रमों के लिए हॉल शामिल हैं। हालांकि, इस सफेद विरासत का सबसे बड़ा दुश्मन पानी और नमी है, जिससे बचाने के लिए वैज्ञानिक लगातार अत्याधुनिक वेंटिलेशन प्रणालियों का उपयोग कर रहे हैं। प्रकृति और मनुष्य के धैर्य की यह जुगलबंदी किसी भी सैलानी के लिए जीवन का सबसे यादगार अनुभव साबित होती है। वीरेंद्र/ईएमएस 10 मार्च 2026