राष्ट्रीय
10-Mar-2026
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-पाक अब दुनिया के उन शीर्ष पांच देशों में शामिल जो सबसे ज्यादा हथियार खरीदते हैं नई दिल्ली,(ईएमएस)। पाकिस्तान अपने 80 फीसदी हथियार चीन से खरीदता है। यह खुलासा नई रिपोर्ट से हुआ है, जिसमें 2025 में दुनियाभर में हुए हथियार सौदों पर फोकस किया गया है। इससे पड़ोसी देश भारत की चिंता बढ़ना स्वभाविक है। वैसे कुछ विश्लेषक इसे भारत के लिए सिर्फ नकारात्मक नहीं बल्कि फायदेमंद भी बता रहे हैं। इस जारी रिपोर्ट से पता चला है कि 2021–25 के बीच दुनिया के देशों के बीच बड़े हथियारों का ग्लोबल वॉल्यूम पिछले पांच साल के टाइमलाइन की तुलना में 9.2 फीसदी ज्यादा हुआ। 2011-15 के मुकाबले ये सबसे बड़ी छलांग है। रिपोर्ट से पता चलता है कि पाकिस्तान अपनी परमाणु और पारंपरिक सैन्य क्षमताओं को लगातार बढ़ा रहा है और सेना का आधुनिकीकरण कर रहा है, लेकिन रिपोर्ट से ये भी पता चलता है कि यूरोपीय देश यूक्रेन युद्ध से डरे हुए हैं और उन्होंने हथियारों की खरीद में भारी बढ़ोतरी की है। 2011-15 के मुकाबले 2021–25 के बीच यूरोपीय देशों की हथियार खरीददारी में 210 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक 2021-2025 के बीच पाकिस्तान के कुल हथियार आयात में चीन की हिस्सेदारी बढ़कर 80फीसदी हो गई है जो 2016-2020 में 73फीसदी थी। 2016–20 की तुलना में 2021–25 के दौरान पाकिस्तान के हथियारों के आयात में 66फीसदी की बढ़ोतरी की है। पाकिस्तान अब दुनिया के उन शीर्ष पांच देशों में शामिल है जो सबसे ज्यादा हथियार खरीदते हैं जिनमें पहले चार जगहों पर यूक्रेन, भारत, सऊदी अरब और कतर हैं। चीन के बाद पाकिस्तान के मुख्य सप्लायर तुर्की और नीदरलैंड हैं। चीन के हथियारों पर पाकिस्तान की हद से ज्यादा निर्भरता भारत के लिए खतरनाक है। पिछले साल मई संघर्ष में हम देख चुके हैं कि चीन पाकिस्तान को सैटेलाइट और सैन्य मदद दे रहा था। पाकिस्तान का चीनी हथियारों का खरीदना सिर्फ सैन्य सौदा नहीं है बल्कि भारत के लिए इसका मतलब दक्षिण एशिया के सैन्य संतुलन में बड़ा बदलाव है, जैसे पाकिस्तान चीनी जे-35 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने के लिए बात कर रहा है। पाकिस्तान के हथियारों की खरीद में 2021-25 के बीच 66फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसमें सबसे बड़ा हाथ चीन का है। इसका मतलब है कि युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान और चीन के हथियार प्रणालियां जैसे फाइटर जेट्स, मिसाइलें और रडार एक-दूसरे के साथ पूरी तरह तालमेल में काम करेंगे। भारत को अब एक साथ दो सीमाओं पर पाकिस्तान की पूरी मिलिट्री लॉजिस्टक अब चीन पर निर्भर है। इसका मतलब है कि चीन और पाकिस्तान भारत को लेकर जो डेटा हासिल करेंगे उसे एक साथ अपने हथियार सिस्टम के साथ इंटीग्रेट कर सकते हैं। युद्ध के समय चीन आसानी से पाकिस्तान को हथियारों की सप्लाई जारी रख सकता है जिससे पाकिस्तान लंबी लड़ाई लड़ने में सक्षम हो जाएगा। भारत के लिए यह नकारात्मक ही नहीं हैं बल्कि कई फायदे भी हैं। भारत को अपने दोनों दुश्मन चीन और पाकिस्तान के हथियारों को लेकर एक जैसी ही तैयारी करनी होगी। रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया है कि चीन के हथियारों की खरीददारी में 72 फीसदी की कमी आई है, लेकिन रूस अभी भी चीन का सबसे बड़ा हथियार का सोर्स है। रूस जितने हथियार खरीदता है उसका 66 फीसदी रूस से खरीदता है। बीजिंग तेजी से रूसी हार्डवेयर को हटाकर अपनी टेक्नोलॉजी जिसमें हेलीकॉप्टर और एयरक्राफ्ट इंजन शामिल हैं, उसका इस्तेमाल कर रहा है। सिराज/ईएमएस 10 मार्च 2026