राज्य
10-Mar-2026


इन्दौर (ईएमएस) विशेष एवं अष्टम सत्र न्यायाधीश अनीता सिंह की कोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में सुनवाई करते आरोपी मनोज यादव पर दर्ज एफआईआर निरस्त करने के आदेश दिए। कोर्ट ने फरियादी के पुलिस एवं कोर्ट कथन में विरोधाभास और परिस्थितिजन्य साक्ष्य तथा फरियादी वकील के तर्कों से सहमत हो पाया कि प्रमाणित नहीं होता कि दुष्कर्म हुआ है। इसके बाद कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ दर्ज एफआईआर निरस्त करने के आदेश इस टिप्पणी के साथ दिए कि, कथित पीड़िता हमेशा सच बोलती हो, ये जरूरी नहीं है। प्रकरण में पैरवी प्रतीक माहेश्वरी, पवन तिवारी, अमृता सोनकर, पुनीत माहेश्वरी, सुनील यादव, हरिओम पंवार, महक मीरानी, अनुराग कुशवाह एवं अर्जुन प्रजापति ने की। अधिवक्ता केपी माहेश्वरी के अनुसार एम जी रोड थाने में दर्ज प्रकरण की कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि मनोज पिता ओंकारलाल यादव पर उनकी 40 वर्षीय किराएदार ने 2 जून 2023 को राजवाड़ा के समीप मकान की पहली मंजिल पर दुष्कर्म और मारपीट कर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था। कोर्ट में ये तथ्य सामने आए कि घटना की रिपोर्ट पांच दिन बाद दर्ज कराई गई, चिकित्सा जांच प्रतिवेदन में शुक्राणु, त्वचा के रेशे या कोई रक्त नहीं मिला। कोर्ट में आरोपी मनोज ने कहा कथित पीड़िता का परिवार उसके मकान में किराएदार है। 18 वर्ष से न किराया दिया है और न मकान खाली कर रहे हैं। किराया मांगने पर झूठा केस दर्ज कराया है। वो मकान हड़पना चाहते हैं। किरायेदारी का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। आरोपी ने जानकारी दी घटना का जो वक्त वह बता रही है, उस वक्त वो चार घंटे तक मोबाइल पर व्यस्त थी। उसने कॉल डिटेल्स के दस्तावेज भी पेश किए। मेडिकल जांच में उसके शरीर पर कोई चोट और संघर्ष के निशान नहीं पाए गए। एमजी रोड पुलिस ने जांच की लेकिन दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई। इस पर कोर्ट ने कहा कि जरूरी नहीं कि दुष्कर्म की कथित शिकार हमेशा सच बोलती हो। कोर्ट में प्रकरण सुनवाई के दौरान एक तथ्य यह भी सामने आया कि पीड़िता ने घटना के पांच दिन बाद अपने पति को जानकारी दी जबकि वो उससे रोज बात कर रही थी। वहीं आसपास रहने वालों ने भी वारदात से इंकार किया। कोर्ट ने पाया जिस प्रथम मंजिल पर घटना होना बताया गया है वहां आरोपी मनोज की कुलदेवी एवं भेरुजी हैं और घर पर महिला के सभी पांच बच्चे भी मौजूद थे। मकान घनी आबादी से घिरा है और 500 फीट दूर पुलिस चौकी है। घटना हुई होती तो बच्चों ने मदद के लिए किसी को पुकारा होता। मनोज की तीन दुकानें भी हैं जिनके दोनों ओर रास्ते व मेनरोड है। ये तथ्य फरियादी के खिलाफ हैं। पुलिस एवं कोर्ट कथन में विरोधाभास है। आनंद पुरोहित/ 10 मार्च 2026