खाने के तेल, घी और रसोई गैस के दाम बढ़े जबलपुर, (ईएमएस)। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालातों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब जबलपुर की आम रसोई तक महसूस किया जा रहा है। शहर में बीते कुछ दिनों के भीतर खाने के तेल, देसी घी और वनस्पति घी के दामों में सीधे 10 रुपये लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दाम में लगभग 60 रुपये की वृद्धि ने मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है। शहर के प्रमुख किराना व्यापारियों का कहना है कि कीमतों में यह बढ़ोतरी स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि थोक बाजार से ही शुरू हुई है। थोक में माल महंगा मिलने के कारण खुदरा दुकानदारों को भी बढ़े हुए दाम पर सामान बेचना पड़ रहा है। पिछले एक सप्ताह में सोयाबीन तेल, रिफाइंड तेल और सरसों तेल के दामों में 8 से 12 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी देखी गई है। इसी तरह देसी घी और वनस्पति घी के पैकेटों के दामों में भी 10 रुपये तक का उछाल आया है। जानकारों का कहना है कि व्यापारियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और समुद्री मार्गों पर अनिश्चितता के कारण आयात लागत बढ़ी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल और कुछ खाद्य तेलों का आयात करता है, इसलिए वैश्विक अस्थिरता का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। रसोई गैस महंगी, डिलीवरी में भी देरी … खाद्य वस्तुओं के साथ-साथ रसोई गैस की कीमतों में भी बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा दी है। घरेलू 14.2 किलोग्राम सिलेंडर की कीमत में लगभग 60 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि गैस बुक कराने के बाद सिलेंडर की डिलीवरी में 15 से 20 दिन तक का समय लग रहा है। कुछ लोगों का आरोप है कि एजेंसियों में लंबी प्रतीक्षा सूची बन गई है। हालांकि संबंधित एजेंसियों का कहना है कि आपूर्ति सामान्य है और बढ़ती मांग के कारण अस्थायी देरी हो सकती है। बजट पर सीधा असर … शहर के गृहणियों का कहना है कि पहले ही महंगाई से राहत नहीं मिल पा रही थी, अब रोजमर्रा की जरूरत की चीजें महंगी होने से मासिक बजट पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। एक मध्यमवर्गीय परिवार जहां पहले महीने का राशन और गैस मिलाकर निश्चित खर्च तय कर लेता था, अब उसे अतिरिक्त 400 से 700 रुपये तक का बोझ उठाना पड़ सकता है। पेट्रोल-डीजल भी हो सकता हैं महंगा.. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहे तो पेट्रोल और डीजल के दामों में भी बढ़ोतरी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसा होने पर परिवहन लागत बढ़ेगी और अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। प्रशासन का दावा बनाम जमीनी हकीकत … सरकार और प्रशासन की ओर से आपूर्ति सामान्य होने और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि घबराने की आवश्यकता नहीं है और बाजार में किसी प्रकार की कृत्रिम कमी नहीं होने दी जाएगी। हालांकि जमीनी स्तर पर उपभोक्ताओं का अनुभव कुछ अलग है। बढ़ते दाम और देरी से मिल रही गैस डिलीवरी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल जबलपुर के लोग बढ़ती महंगाई के बीच राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय हालात किस दिशा में जाते हैं और सरकार महंगाई पर नियंत्रण के लिए क्या कदम उठाती है, इस पर शहरवासियों की नजरें टिकी हुई हैं। सुनील साहू / मोनिका / 10 मार्च 2026/ 05.47