उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार केबिनेट बैठक कर विभिन्न निर्णय तो ले रही है ,लेकिन वास्तव में धामी सरकार की कैबिनेट वर्षों से आधी अधूरी है।केबिनेट के 12 सदस्यों के बजाए मात्र 7 ही वजूद में है और वही केबिनेट निर्णय भी ले रहे है।जिनपर 12 सदस्यों के सापेक्ष मात्र 7 सदस्य होने के कारण सवाल भी उतना स्वाभाविक है।सरकार के स्प्ष्ट बहुमत में होने के बावजूद ऐसी क्या कमी या परेशानी है ,जो सरकार अपने मंत्रिमंडल को पूरा नही कर पा रही है।जिसे लेकर उत्तराखंड की सियासत एक बार फिर गर्माने लगी है। लंबे समय से कैबिनेट विस्तार का इंतजार कर रहे विधायकों के अरमान बिखरते नज़र आ रहे हैं। पुष्कर सिंह धामी सरकार ने पांच खाली पदों को भरने की तैयारी की तैयारी तो कई बार शुरू की है,लेकिन फिर भी खाली पद भरे नही जा सके। इस साल या अगले वर्ष के शुरू में राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भी कैबिनेट विस्तार अहम माना जा रहा है।राज्य मंत्रिमंडल में फिलहाल पांच पद खाली हैं। इनमें से चार पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं, जबकि एक पद पूर्व संसदीय कार्य मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद पिछले वर्ष खाली हुआ था। भाजपा विधायकों को इन पदों के भरे जाने का बेसब्री से इंतजार है।भाजपा सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जब भी दिल्ली दौरे पर जाते है तो कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं तेज हो जाती है। कई बार धामी कह भी चुके है कि उनकी शीर्ष नेतृत्व से अहम बातचीत हुई है। माना जा रहा था कि शीर्ष नेतृत्व की हरी झंडी मिलने के बाद इस पर जल्द फैसला किया जाएगा।लेकिन हर बार मंत्रिमंडल विस्तार ठंडे बस्ते में चला जाता है। मुख्यमंत्री धामी के साथ ही प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी इस संबंध में कई बार संकेत दिए है। उन्होंने कहा कि धामी कैबिनेट के खाली पद भरने को लेकर लंबे समय से कवायद जारी है। बातचीत अंतिम चरण में है और जल्द ही रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।जिसे लेकर उत्तराखंड के सियासी गलियारों में कैबिनेट में शामिल किए जाने वाले चेहरों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। जिन नामों को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं उनमें विधायक खजानदास, मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा, विनोद कंडारी, भरत चौधरी, बंशीधर भगत, राम सिंह कैड़ा आदि के नाम शामिल हैं।पुष्कर सिंह धामी से कई विधायकों ने मिलकर अपनी दावेदारी भी की है,वही कई भाजपा हाईकमान का दरवाजा खटखटा चुके है।पिछले दिनों मंत्री पद के दावेदार विधायकों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात भी की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद सोशल मीडिया के जरिए विधायकों से मुलाकात की जानकारी दी थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिलने वाले भाजपा विधायकों में गंगोलीहाट विधायक फकीर राम टम्टा, रुद्रप्रयाग विधायक भरत सिंह चौधरी, गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान, जागेश्वर विधायक मोहन सिंह माहरा तथा दायित्वधारी कैलाश पंत और रजनी रावत शामिल थे। भाजपा जब सन 2022 में लगातार दूसरी बार सत्ता में आई तो मुख्यमंत्री धामी सहित कुल नौ मंत्रियों ने शपथ ली थी। संवैधानिक प्रावधान के तहत उत्तराखंड में राज्य मंत्रिमंडल में अधिकतम 12 सदस्य हो सकते हैं।अप्रैल 2023 में सामाजिक कल्याण और परिवहन मंत्री चंदन रामदास के निधन के बाद मंत्रिमंडल में आठ सदस्य रह गए थे और प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद यह संख्या घटकर सात पर पहुंच गई। भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने स्वयं माना कि 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव भी अब ज्यादा दूर नहीं है। यह बिल्कुल सही समय है कि मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल का विस्तार और उसमें फेरबदल करे।भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने माना कि राज्य मंत्रिमंडल के विस्तार का सही समय आ गया है। उन्होंने कहा कि उनकी इस मामले पर मुख्यमंत्री के साथ चर्चा हुई है और वे इस बात पर सहमत हैं कि राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार के लिए यह उपयुक्त समय है। सूत्रों ने बताया कि मंत्रिमंडल विस्तार से पहले पार्टी के केंद्रीय नेताओं की राय लेने के लिए मुख्यमंत्री एक बार फिर दिल्ली जा सकते हैं।अब दिल्ली में उन्हें मंत्री पद के खाली 5 पदों को भरने की अनुमति मिलती है या नही ,यह भाजपा हाईकमान ही बता सकती है,लेकिन इतना जरूर है कि चुनाव की आहट तक पहुंच जाने पर भी मंत्रिमंडल के 5 पदों को न भरा जाना यह दर्शाता है कि शायद धामी सरकार को 5 विधायकों को मंत्री बनाने पर मंत्री बनने से वंचित रहने वाले विधायकों में असंतोष पनपने का डर सता रहा है।इसी कारण ये पद अभी तक भरे नही गए है। (लेखक राजनीतिक चिंतक व वरिष्ठ पत्रकार है) (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है) .../ 11 मार्च /2026