ज़रा हटके
11-Mar-2026
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वॉशिंगटन (ईएमएस)। सूर्य का अध्ययन करने के लिए भेजे गए यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ईएसए) के दो सैटेलाइट्स में से एक का संपर्क अचानक टूट गया है। स्पेस एजेंसी के प्रोबा-3 मिशन के सोलर पैनल सूरज की ओर नहीं रहे और बैटरी तेजी से डिस्चार्ज होने लगी। सैटेलाइट ने स्वयं को सर्वाइवल मोड में डाल लिया और अब यह पृथ्वी से भेजे गए सिग्नल का कोई जवाब नहीं दे रहा। दिसंबर 2024 में भारत के पीएसएलवी रॉकेट के जरिए लॉन्च किए गए इस मिशन की सफलता अब गंभीर खतरे में दिख रही है। वैज्ञानिकों ने अभी तक इस तकनीकी खराबी की असली वजह का पता नहीं लगाया है। प्रोबा-3 मिशन में दो यान शामिल हैं – कोरोनोग्राफ और ऑकुल्टर। इनका काम अंतरिक्ष में कृत्रिम सूर्य ग्रहण उत्पन्न कर सूर्य के बाहरी वातावरण यानी कोरोना की तस्वीरें लेना है। दोनों सैटेलाइट्स को एक-दूसरे से लगभग 150 मीटर की दूरी पर उड़ना होता है और उनकी एलाइनमेंट मिलीमीटर स्तर तक सटीक रखी जाती है। ऑकुल्टर सूरज की तेज रोशनी को ढकता है, जिससे कोरोनोग्राफ कोरोना की इमेजिंग कर पाता है। जून 2025 में मिशन ने पहली बार सूर्य के कोरोना की ऐतिहासिक तस्वीरें भेजकर वैज्ञानिकों और दुनिया को चौंका दिया था। 6 मार्च 2026 को ईएसए ने जानकारी दी कि कोरोनोग्राफ यान में तकनीकी खराबी के कारण एक ‘चेन रिएक्शन’ शुरू हो गया। यान ने अपनी दिशा खो दी, सोलर पैनल सूरज की ओर नहीं रहे और बैटरी तेजी से डिस्चार्ज होने लगी। इसके बाद यान सर्वाइवल मोड में चला गया और अब अंतरिक्ष में केवल एक धातु का टुकड़ा तैरता नजर आ रहा है। वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मिशन की सफलता अत्यधिक सटीकता पर निर्भर है। अब ईएसए की टीम सुरक्षित बचे ऑकुल्टर यान को खराब हुए कोरोनोग्राफ के पास ले जाकर स्थिति का आकलन करने पर विचार कर रही है। यह कदम जोखिम भरा है, लेकिन इससे यह पता लगाया जा सकता है कि यान में कितनी क्षति हुई है और क्या इसे दोबारा सक्रिय किया जा सकता है। यदि अगले कुछ दिनों में संपर्क नहीं सुधरा, तो करोड़ों यूरो के इस मिशन की पूरी सफलता खतरे में पड़ सकती है। प्रोबा-3 का मिशन इस लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सूर्य का कोरोना वह हिस्सा है, जहां से सौर तूफान उत्पन्न होते हैं। ये तूफान पृथ्वी पर संचार प्रणालियों, जीपीएस और पावर ग्रिड को प्रभावित कर सकते हैं। प्रोबा-3 के गुम होने से वैज्ञानिकों को वह डेटा प्राप्त नहीं हो रहा है, जो भविष्य में सौर तूफानों की सटीक भविष्यवाणी में मददगार होता। यूरोप की पूरी स्पेस टीम इस सूर्य जासूस सैटेलाइट को दोबारा खोजने और उसे पटरी पर लाने के लिए दिन-रात जुटी हुई है। सुदामा/ईएमएस 11 मार्च 2026