राष्ट्रीय
12-Mar-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ी भीषण जंग ने इस वक्त पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को हिलाकर रख दिया है। विशेष रूप से सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) वर्तमान में युद्ध का अखाड़ा बना हुआ है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में लगातार तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने और उन्हें डुबोए जाने की खबरों के बीच पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट को लेकर हाहाकार मचा है। लेकिन इस भीषण तनाव के बीच भारत ने अपनी सधी हुई और दूरदर्शी कूटनीति के दम पर एक असंभव लगने वाले कार्य को संभव कर दिखाया है। लाइबेरियाई झंडे वाला विशाल तेल टैंकर शेनलोंग, जो सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर आ रहा था, सुरक्षित रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर मुंबई बंदरगाह पहुंच गया है। यह घटना इसलिए असाधारण है क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद भारत की ओर आने वाला यह पहला जहाज है, जिसने इस खतरनाक समुद्री रास्ते से निकलकर अपनी मंजिल तय की है। ज्ञात हो कि ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि वह अमेरिका और इजरायल के सहयोग वाले जहाजों को इस मार्ग से गुजरने नहीं देगा। ऐसे में शेनलोंग का सुरक्षित पहुंचना भारत की एक बहुत बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जा रही है। इस सफलता की पटकथा मंगलवार, 10 मार्च को लिखी गई थी, जब भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से फोन पर लंबी और विस्तृत चर्चा की। ईरान द्वारा केवल चीन के जहाजों को रास्ता देने की घोषणा के बाद, जयशंकर ने मोर्चा संभाला और भारत की ऐतिहासिक दोस्ती व रणनीतिक स्वायत्तता का हवाला देते हुए भारतीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की। इस दौरान उन्होंने जर्मनी और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रियों से भी संपर्क साधा ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति स्पष्ट रहे। करीब 1,35,335 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर यह विशाल टैंकर बुधवार दोपहर 1 बजे मुंबई बंदरगाह पहुंचा और शाम को इसे जवाहर द्वीप पर बर्थ किया गया। इस जहाज पर भारत, पाकिस्तान और फिलीपींस के कुल 29 क्रू सदस्य सवार हैं। मुंबई पोर्ट अथॉरिटी के अधिकारियों के अनुसार, जहाज से तेल उतारने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिसमें लगभग 36 घंटे लगेंगे। यह कच्चा तेल मुंबई के माहुल स्थित रिफाइनरियों में भेजा जाएगा, जो देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालांकि शेनलोंग सुरक्षित पहुंच गया है, लेकिन भारतीय नौवहन निदेशालय के अनुसार चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। वर्तमान में 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज अब भी युद्ध प्रभावित क्षेत्र के आसपास मौजूद हैं। भारत ने अपनी सक्रिय कूटनीति के जरिए अब तक देश महिमा, स्वर्ण कमल और विशवा प्रेरणा जैसे 7 अन्य जहाजों को भी सुरक्षित जल क्षेत्र में पहुंचाने में सफलता हासिल की है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि वैश्विक अस्थिरता के दौर में भी भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है। वीरेंद्र/ईएमएस/12मार्च2026