नई दिल्ली (ईएमएस)। सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश में 2024 में पांच साल की एक बच्ची का यौन उत्पीड़न और हत्या करने के दोषी व्यक्ति को सुनाई गई मौत की सजा को रोक दिया है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन वी अंजारिया की बेंच ने अतुल निहाले की ओर से दायर अपील की सुनवाई कर आदेश पारित किया। निहाले ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जनवरी के फैसले को चुनौती दी है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले में उसकी दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने 10 मार्च को पारित आदेश में कहा, वर्तमान अपीलों की सुनवाई और अंतिम निपटारे तक मृत्युदंड की सजा के अमल पर रोक रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट और संबंधित निचली अदालत से मूल मामले का रिकॉर्ड मंगाया है। बेंच ने राज्य को निर्देश दिया कि वह अपीलकर्ता से संबंधित सभी परिवीक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट 12 हफ्ते के अंदर उसके समक्ष प्रस्तुत करे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, भोपाल स्थित केंद्रीय कारागार के अधीक्षक अपीलकर्ता की ओर से जेल में रहते हुए किए गए कार्य की प्रकृति और उसके आचरण और व्यवहार के संबंध में 12 हफ्ते की अवधि के अंदर रिपोर्ट प्रस्तुत करे। बेंच ने भोपाल मेमोरियल अस्पताल और अनुसंधान केंद्र के प्रमुख को अपीलकर्ता का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन करने के उद्देश्य से एक उपयुक्त टीम गठित करने का निर्देश दिया। बेंच ने कहा कि जेल अधीक्षक यह सुनिश्चित करेगा, कि गोपनीयता के हित में, साक्षात्कार एक अलग कक्ष में आयोजित किए जाएं, जहां कोई भी जेल अधिकारी या पुलिसकर्मी आसपास न हो और साक्षात्कारों को रिकॉर्ड करने के लिए ऑडियो रिकॉर्डर के इस्तेमाल की अनुमति दी जाए। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 16 सप्ताह बाद के लिए स्थगित कर दी। निचली अदालत ने मामले में अपीलकर्ता को दोषी मनाकर मौत की सजा सुनाई थी। पीड़िता की मां ने सितंबर, 2024 में भोपाल में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी बेटी लापता है। पुलिस के अनुसार, तलाशी अभियान के दौरान पुलिसकर्मियों को दुर्गंध महसूस हुई और वे ईदगाह हिल्स स्थित एक फ्लैट में पहुंचे जहां उन्हें बाथरूम में एक प्लास्टिक के टैंक में पीड़िता का शव मिला। आशीष दुबे / 12 मार्च 2026