नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट में दिल्ली स्कूल एजुकेशन (फीस तय करने और रेगुलेशन में ट्रांसपेरेंसी) अधिनियम-2025 का बचाव किया। सरकार ने कहा कि शैक्षिक संस्थान चलाने के अधिकार में मुनाफा कमाना या कैपिटेशन फीस लेना शामिल नहीं है। दिल्ली स्कूल एजुकेशन (फीस तय करने और रेगुलेशन में ट्रांसपेरेंसी) अधिनियम-2025 का विरोध करने वाली विभिन्न स्कूलों की याचिकाओं पर गुरुवार को दिल्ली सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में जवाब दिया। निजी स्कूलों को लेकर जारी किए नए फीस रेगुलेशन कानून का बचाव करते हुए दिल्ली सरकार ने अदालत को बताया है कि शैक्षिक संस्थान चलाने के अधिकार में मुनाफा कमाने या कैपिटेशन फीस लेने का अधिकार शामिल नहीं है। शिक्षा निदेशालय (डीओई) ने कहा कि यह कानून राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसार शिक्षा में व्यवसायीकरण और मुनाफा कमाने पर रोक लगाने के लिए बनाया गया था। शिक्षा निदेशालय ने जोर देकर कहा कि यह अधिनियम संविधान के अनुच्छेद-30 के तहत अल्पसंख्यक संस्थान के मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं करता है, क्योंकि अल्पसंख्यकों के लिए भी गलत प्रबंधन का अधिकार शामिल नहीं है। दिल्ली सरकार के तर्कों को सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने मामले की सुनवाई अप्रैल माह तक के लिए स्थगित कर दी। डीओई ने अपने प्रत्युत्तर में कहा कि यह अधिनियम स्कूलों के जायज व्यवसायिक हित को सही तरीके से एडजस्ट करता है क्योंकि यह स्कूल प्रबंधन से फीस तय करने का अधिकार नहीं छीनता है, बल्कि सिर्फ मुनाफा कमाने पर रोक लगाने के लिए एक सही व्यवस्था बनाता है। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/13/मार्च/2026