गुना (ईएमएस)। भारत मुक्ति मोर्चा एवं राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के तत्वाधान में शुक्रवार को विभिन्न संवैधानिक मांगों को लेकर राष्ट्रव्यापी चरणबद्ध आंदोलन के दूसरे चरण के तहत जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया गया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में कलेक्टोरेट पहुंचकर केंद्र सरकार के विरुद्ध नारेबाजी की और महामहिम राष्ट्रपति के नाम डिप्टी कलेक्टर संजीव खेमरिया को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। इस दौरान जिला संयोजक प्रजेश सिंह सिसोदिया ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने उनकी जायज मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आगामी 23 अप्रैल को भारत बंद जैसा कड़ा कदम उठाया जाएगा। आंदोलनकारियों ने मुख्य रूप से तीन मांगों को प्रमुखता से शासन के समक्ष रखा है। पहली मांग के तहत संगठन का आरोप है कि केंद्र सरकार ने कैबिनेट में ओबीसी की जाति आधारित जनगणना का फैसला तो ले लिया, लेकिन जनगणना नोटिफिकेशन में ओबीसी जातियों के लिए अलग से कॉलम नहीं दिया गया है। इसे ओबीसी वर्ग के साथ बड़ी धोखाधड़ी बताते हुए मांग की गई है कि इस वर्ष होने वाली राष्ट्रीय जनगणना में ओबीसी की जातियों का कॉलम अनिवार्य रूप से बढ़ाया जाए। दूसरी प्रमुख मांग के रूप में अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के हितों की रक्षा के लिए सख्त यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन बनाकर लागू करने पर जोर दिया गया है, ताकि शिक्षा के क्षेत्र में इन वर्गों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ न हो सके। तीसरी और महत्वपूर्ण मांग के अंतर्गत संगठन ने मांग उठाई है कि वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त किए गए सभी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता से तत्काल मुक्त किया जाए। ज्ञापन सौंपते समय जिलाध्यक्ष प्रजेश सिंह सिसोदिया ने बताया कि आंदोलन के प्रथम चरण में 6 मार्च को ज्ञापन दिया गया था और आज जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन कर विरोध दर्ज कराया गया है। आगामी रणनीति के तहत 23 मार्च को जिला स्तर पर विशाल रैली निकाली जाएगी। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में मोर्चा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए यह जनआंदोलन और अधिक उग्र एवं व्यापक किया जाएगा।।-सीताराम नाटानी