ज़रा हटके
14-Mar-2026
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-रिपोर्ट से खुलासा, भारत में विकल्पों के जन स्वास्थ्य पर प्रभाव के आंकड़े उपलब्ध नहीं लंदन (ईएमएस)। जिन देशों में एक वैज्ञानिक प्रमाण के आधार पर निकोटीन के सुरक्षित विकल्पों को मंजूरी दी गई है, वहां पर सिगरेट के सेवन और उससे जुड़ी बीमारियों में तेज व स्थिर कमी दर्ज की गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक जब तम्बाकू नियंत्रण की मौजूदा नीतियों के साथ सिगरेट का सेवन करने वालों को रैगुलेटेड और कम नुकसान वाले निकोटीन उत्पाद उपलब्ध होते हैं, तो सिगरेट के सेवन में कमी आती है और जन स्वास्थ्य में सुधार होता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जापान और स्वीडन में सिगरेट के सेवन में तेजी से कमी दर्ज की गई क्योंकि ग्राहकों ने हीटेड टोबैको और ओरल निकोटीन प्रोडक्ट्स जैसे सुरक्षित विकल्पों का सेवन शुरू कर दिया। जापान में पुरुषों के बीच सिगरेट का सेवन साल 2020 में गिरकर 30 फीसदी से नीचे चला गया। साल 2016 में टोबैको हीटिंग सिस्टम पेश होने के बाद ऐसा पहली बार हुआ था। इससे पहले सालों तक सिगरेट का सेवन स्थिर बना हुआ था। इस गिरावट ने पांच सालों में सिगरेट के सेवन में 32 फीसदी कमी लाने में एक अहम योगदान दिया है। वहीं दूसरी ओर स्वीडन में सिगरेट का सेवन साल 2023 में गिरकर 5.6 फीसदी तक पहुंच गया, जिससे यह देश सिगरेट सेवन मुक्त देश बनने के करीब पहुंच गया। देश में सिगरेट सेवन में हुई इस गिरावट में साल 2016 में बाजार में शुरू किए गए स्नस और निकोटीन पाउच का बड़ा योगदान था। सिगरेट सेवन में यह गिरावट लाने के लिए सिगरेट पर रोक लगाने की जरूरत भी नहीं पड़ी बल्कि इसके लिए व्यस्कों को कम नुकसान वाले रैगुलेटेड और विज्ञान पर आधारित विकल्प उपलब्ध कराए गए। भारत में कम नुकसान वाले विकल्पों के जन स्वास्थ्य पर प्रभाव के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। साल 2019 में इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम पर बैन के कारण हीटेड टोबैको प्रोडक्ट्स पर भी रोक लगा दी गई, जबकि ये दोनों बिल्कुल अलग हैं। भारत में इन उत्पादों में अंतर करने के लिए कोई भी ठोस वैज्ञानिक आकलन नहीं किया गया। न ही भारत में जापान, स्वीडन, यूके, अमेरिका, न्यूजीलैंड जैसे देशों से प्राप्त हो रहे विस्तृत वैज्ञानिक और वास्तविक प्रमाणों पर ही कोई गौर किया गया। नतीजा यह हुआ कि भारत में सिगरेट का सेवन करने वालों को रैगुलेटेड और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित विकल्प उपलब्ध नहीं हो पाए और वो कम नुकसान वाले विकल्पों को चुनने के अपने अधिकार से वंचित रहे। भारत में तम्बाकू से होने वाली मौतों का भार विश्व में सबसे ज्यादा है। इसलिए कम नुकसान वाले निकोटीन उत्पादों पर लगाए गए बैन पर पुनर्विचार करने की जरूरत है, ताकि जनस्वास्थ्य में सुधार लाने की संभावनाएं टटोली जा सकें। युवाओं को सुरक्षा देने वाला विज्ञान पर आधारित फ्रेमवर्क व्यस्कों को ज्यादा सुरक्षित विकल्प उपलब्ध करा सकता है, जिससे भारत को ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस अपनाने और सिगरेट सेवन से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी। सिराज/ईएमएस 14 मार्च 2026