ज़रा हटके
14-Mar-2026
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मिलान,(ईएमएस)। इटली सरकार ने कला जगत के इतिहास में एक बड़ा कदम उठाते हुए महान चित्रकार कारवागियो की एक अत्यंत दुर्लभ और बेशकीमती पेंटिंग को खरीद लिया है। इस ऐतिहासिक मास्टरपीस के लिए सरकार ने 30 मिलियन यूरो, यानी लगभग 320 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि का भुगतान किया है। इटली के इतिहास में किसी एकल कलाकृति के लिए सरकार द्वारा किया गया यह अब तक का सबसे बड़ा निवेश माना जा रहा है। यह पेंटिंग मॉन्सिग्नोर माफेओ बार्बेरिनी का पोर्ट्रेट है, जो बाद में इतिहास में पोप अर्बन आठवें के रूप में प्रसिद्ध हुए। इटली के संस्कृति मंत्रालय ने इस खरीद को राष्ट्र के लिए असाधारण महत्व का निर्णय बताया है, जिसका मुख्य उद्देश्य ऐसी अमूल्य धरोहरों को निजी संग्रहकर्ताओं के हाथों में जाने से रोकना और आम जनता के लिए उपलब्ध कराना है। लगभग 400 साल पुरानी यह कलाकृति 1598 के आसपास तैयार की गई थी। इसमें माफेओ बार्बेरिनी को एक प्रभावशाली दाढ़ी वाले धर्मगुरु के रूप में चित्रित किया गया है, जिनका दायां हाथ एक विशिष्ट मुद्रा में आगे बढ़ा हुआ है। माफेओ बार्बेरिनी ने 1623 से 1644 तक पोप के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं और उन्हें कला व संस्कृति का महान संरक्षक माना जाता था। कला विशेषज्ञों के अनुसार, यह पोर्ट्रेट उस दौर की जटिल राजनीतिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों का सजीव चित्रण पेश करता है। कारवागियो, जिनका वास्तविक नाम माइकलएंजेलो मेरिसी था, बारोक कला शैली के सबसे क्रांतिकारी चित्रकारों में से एक थे। वर्तमान में दुनिया भर में उनकी केवल 65 मूल पेंटिंग्स ही अस्तित्व में हैं, जिनमें से महज तीन ही पोर्ट्रेट शैली की हैं, जो इस नई खरीद को और भी विशिष्ट बनाती हैं। कारवागियो अपनी चियारोस्क्यूरो तकनीक के लिए विश्व विख्यात थे, जिसमें वे प्रकाश (लाइट) और छाया (शैडो) के बीच गहरे विरोधाभास का उपयोग कर पात्रों को बेहद जीवंत और नाटकीय रूप देते थे। यह दुर्लभ पेंटिंग अब तक फ्लोरेंस के एक निजी संग्रह का हिस्सा थी और इसे पहली बार वर्ष 2024 में रोम में प्रदर्शित किया गया था। अब सरकार के इस फैसले के बाद, इसे स्थायी रूप से रोम के प्रसिद्ध पलाजो बार्बेरिनी म्यूजियम में रखा जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि यह म्यूजियम वही ऐतिहासिक इमारत है जो कभी बार्बेरिनी परिवार का निवास स्थान हुआ करती थी। संस्कृति मंत्री एलेस्सांद्रो जिउली ने प्रतिबद्धता जताई है कि इटली अपनी ऐतिहासिक पहचान और महान कलाकारों की कृतियों को संरक्षित करने के लिए भविष्य में भी ऐसे ठोस प्रयास जारी रखेगा। वीरेंद्र/ईएमएस 14 मार्च 2026