लेख
15-Mar-2026
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भारत के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इच्छा मृत्यु की अनुमति दी है. कोर्ट ने 13 साल से ज़्यादा समय से कोमा में 32 साल के हरीश राणा का लाइफ़ सपोर्ट (जीवनरक्षक मशीनें) हटाने की मंज़ूरी दे दी है. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने इस मामले पर फै़सला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पैसिव यूथेनेशिया पर व्यापक क़ानून बनाने पर विचार करने को भी कहा है. कोर्ट ने एम्स-दिल्ली को यह भी निर्देश दिया है कि लाइफ़ सपोर्ट हटाने के लिए एक ख़ास योजना तैयार की जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज़ की गरिमा और सम्मान बना रहे जीवन और मौत संसार की एक प्रक्रिया है। जीवन और मृत्यु में सिर्फ साँसो का फासला है जो 1सेकंड का है जब ब्रेन से हर्ट से ऑक्सीजन सप्लाई बन्द हो जाता है इसलिए कोर्ट इस पर फैसला नहीं दे सकता है क्योंकि ऐ शरीर कोर्ट ने नहीं बनाया है ऐ तो परमात्मा ने बनाया है तब परमात्मा ही उसे ले सकता है जब इन्सान जिन्दा होता है तो कोई उसका हाल तक नहीं पूछता लेकिन जब संसार से रुखस्त हो जाता है तो हर आदमी मातम में शामिल होने में अपनी शान समझतें हैदेखिए जीवन को मस्ती से जिए और खुश रहें जब आदमी जवान होता है तो उसकी इक्षा पढ़ने के साथ साथ काम की भी होती हैं वही आपके दुःखो का सही कारण है हमने कितने ऐसे लोगों को ट्रेन में भर भर कर मात्र 140-150सीट में बिहार में नौकरी के लिए जाते देखा है पढ़ते देखा है महीनों से जाग जाग कर लाइन में 4 बजे सुबह से दोपहर 2 बजे 12 रूपये के पोस्टल ऑर्डर के लिए मुख्य डाकखाना में 1992-95 के दौर में लाइन में लगते देखा है बिहार में और भी अन्य सटे राज्य में भी सरकारी नौकरी के लिए मारा मारी थी और उप्र में भी यही हाल था मैंने पूछा भाई आप पोस्ट ग्रेजुएशन किए हैं ऐ मैट्रिक के स्टाफ सिलेक्शन में लोअर ग्रेड एग्जाम के लिए क्यों इतना संघर्ष कर रहें हैं उसने कहा 12 रूपये में सरकारी नौकरी मिल जाएगी कम है क्या उस समय नौकरी में 3 हजार से लेकर बहुत मुश्किल से 10000 तक ही मिल पाता था यदि ग्रेड 1 की नौकरी मिले हालांकि हमने अपने लिए नहीं अपने बहन के लिए पोस्टल ऑर्डर ख़रीदा था उस समय माता पिता को भी बच्चे की नौकरी या इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन का प्रबल इक्षा रहती थी और जब किसी को नौकरी मिलती तो उसके सालों की तपस्या का फल होता था उस समय मैं सरकारी नौकरी की बात कर रहा हूँ बिहार में तो जंगलराज था नौकरी क्या कोचिंग में क्लास लेने के लिए किसी नेता से पहचान होना जरुरी था अतः बिहार जो आज है वो नीतीश कुमार के काम के कारण है अब ऐ अलग बात है आज बिहार में चुनाव में मुख्य मंत्री की दौड़ में कौन क्या कर रहा है लेकिन ऐ बात भी मान कर चलिए की नीतीश कुमार सिर्फ बिहार में ही नहीं केंद्र में भी सरकार के लिए एक सपोर्ट का काम कर रहें हैं अब मुख्य मंत्री कौन होगा ऐ तो चुनाव जितने के बाद ही तय होगा लेकिन उनकी मर्जी के खिलाफ होने पर वो पारा भी बदल लेते है और वहाँ एक राजनीती संकट आ जाता है जाने दो कितना दिन और मुख्य मंत्री रहेंगे अगर ठीक काम किया है और ईमानदार है तो इसमें मुख्य मंत्री में नीतीश कुमार की घोषणा करना एनडीए के लिए ही फायदेमंद होगा क्योंकि हाल ही में बिहार के बीजेपी के सांसद रूडीप्रताप सिंह के हाल ही में हुए कांस्टीट्यूशन क्लब में भाजपा बनाम भाजपा मुकाबला समाप्त, राजीव प्रताप रूडी ने सचिव पद पर 102 मतों से जीत दर्ज की।इसमें भी बिहार के एमपी होने के नाते नीतीश कुमार का भी हाथ था जिसे पार्टी समझ नहीं पाई थी इसलिए बिहार में नई सरकार नीतीश कुमार के बिना मुख्य मंत्री बनाने पर पाला बदल लेंगे और नुकसान होगा क्योंकि केंद्र में बहुमत नहीं है अतः उस समय जो कार्य किया वो जनहित में बिहार के विकास के लिए किया अतः 1995 के दौर में नौकरी मिलना मुश्किल था क्योंकि इन्वेस्टमेंट वहाँ कहाँ था और मुंबई या गुजरात की दुरी कितनी थी और वहाँ भी पैसे कहाँ बचते थे अतः लोग प्रायः अपने प्रदेश में ही नौकरी चाहते थे और जिसे मिली लड़की वाले के लोगों का आना उसके घर में ताँता लग जाता था और दहेज भी अच्छी खासी मिली लड़की को देखकर लड़का भी प्रेम में डूबा रहा और यही से धीरे धीरे माता पिता से दुरी बढ़ी और ईश्वर भी मनुष्य को काम का ऐसा रोग दे दिया है जो संतान उत्पति के लिए होता है लेकिन ईश्वर ने आपसी प्रेम को बरकरार रखने के लिए इस अनुठे स्पर्श से मनुष्य को माया जाल में बाँध दिया और यही से आपकी मनोवृत्ति बदल जाती है और आप उस जाल में फंस जाते हैं फिर यदि रिश्ते में दरार आयी तो कितने ने आत्महत्या भी की कितने नो एक से तो बंधे थे और भी कई लड़की से बन्ध गए जो चोरी चोरी हुआ लेकिन आप दलदल में और फँसते गए और फिर किसी आशा को लेकर ना मिलने से निराशा हुई फिर देखा देखी हुई उसको इतना मिला आपको कम क्यों मिला इससे आप टूटे लेकिन यहीं अगर भगवान राम का सही तरीके से ध्यान करेंगे तो प्रभु राम से आपको सच और गलत का अंदाजा हो जायेगा और उनके चरणविंद से आप वहाँ से बच जायेंगे क्योंकि मछुआरा अपने पैर के पास की मछली को पकड़ नहीं पाता और आप ब्लैक मेल नहीं होंगे ऐ सोच लेना सब उसी की मर्जी से हुआ है और इसमें हमारी भी गलती होगी जो है काम वासना इस पऱ यदि नियंत्रण हो गया तो आप कभी निराश नहीं होंगे ना ही मौत से डर लगेगा और अंतः में वही आपको मुक्ति का मार्ग दिखऐगा इसलिए निर्णय सावधानी से के शांति से काम करे और पीछे मुड़ कर ना देखें जब काम वासना अपनी ओर खींचे तो प्रभु राम का ध्यान कर लीजियेगा सब ठीक होगा भगवान राम ने हर समय आपको जीने का सही मार्ग बताया है उन्होंने जहाँ माता सीता के लिए रावण से युद्ध भी किया तो दूसरी ओर अपनी प्रजा के कहने पर छोड़ भी दिया यहीं है भगवान राम की शक्ति जिसका आभास बाऱ बार ध्यान और कर्म से मिलेगा.जीवन और मौत की क्रिया को सिर्फ भगवान राम ही बता सकते हैं अतः अन्त में राम नाम सत्य होता है.आपको बहुत ही छोटा अवधी ही मिला है क्योंकि अधिक समय तो आप काम धंधा और सोने खाने पीने में बिता देते हैं तो आप सही में जीवन कहाँ जियें सेवा में जीवन बिताना हो तो गुरूद्वारे में जाकर देखें गुरुवों के त्याग तपस्या और बलिदान के कारण उन्होंने अपना जीवन परमात्मा के लिए मानवीय मूल्यों की रक्षा में बलिदान दिया ऐ भी प्रेरणा भगवान राम से ही मिली है जो आज काम वासना, लोभ लालच क्रोध में जीवन बिता कर जीवन का आनंद ले रहा है तो यह भ्रम है खुब मजा लेने दीजिये उसे भी ऊपर ही जाना है और आपको भी लेकिन वों अन्त समय में दुनिया छोड़ने पर अपने किए पर बहुत पछतावा होगा लेकिन आप आंनद की अनुभूति करेंगे जीवन और मृत्यु एक प्रक्रिया है लेकिन जो मनुष्य सांसारिक मोह माया को त्याग कर भगवान राम की भक्ती में अपना जीवन बिताता है उसकी समाधि तक लग जाती है अतः खुश रहें और किसी से ना डरे जो होगा प्रभु राम की कृपा से अच्छा होगा.मुझे भी अपनो ने आज दिन तक क़ोई भी मुझे इतना कस कर डांटा नहीं था इसलिए डर ऐसा हुआ है जो दुरी बढ़ा दिया है और भगवान राम ने रास्ता दिखाया खुशी से रहने का जो आनंद का सबसे बड़ा स्रोत है। (यह लेखक के व्य‎‎‎क्तिगत ‎विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अ‎निवार्य नहीं है) .../ 15 मार्च /2026