लेख
15-Mar-2026
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- अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर सारी दुनिया में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने अमेरिका में ‘क्रेडिबल थ्रेट’ का अलर्ट जारी किया है। उसके बाद से अमेरिका में और घबराहट देखी जा रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को व्हाइट हाउस के अंडर ग्राउंड के बंकर में सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी गई है। सुरक्षा के लिहाज से वह अपना ज्यादा समय बंकर में बिता रहे हैं। व्हाइट हाउस में बना बंकर सुरक्षा के लिहाज से बेहद अत्याधुनिक है। इसे राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए आपातकालीन परिस्थितियों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। इस बंकर की लंबाई 761 फीट, चौड़ाई 10 फीट और ऊंचाई 7 फीट है। यहां हवा, पानी, भोजन और संचार जैसी सभी अत्याधिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। ईरान ने हाल ही में मध्य पूर्व देशों के अमेरिकी ठिकानों और इजरायल के ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन से घातक हमले किए हैं। इन हमलों को अमेरिका और इजरायल की सुरक्षा एजेंसियों ने गंभीरता से लिया है। ईरान के पास इन दिनों चीन, रूस और नॉर्थ कोरिया के भी हथियार होने की संभावना देखी जा रही है। ईरान के पास बड़ी संख्या में अत्याधुनिक हथियार हैं। हथियारों के संबंध में जानकारी अमेरिका और इजरायल को तब लग पा रही है, जब ईरान उनका उपयोग कर रहा है। जिससे अमेरिका में राष्ट्रपति और महत्वपूर्ण लोगों की सुरक्षा का खतरा, गंभीर चेतावनी बनकर सामने आया है। हालांकि ईरान के पास सीधे अमेरिका तक मार करने वाली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें या फाइटर जेट्स उपलब्ध नहीं हैं। फिर भी अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियों को ड्रोन हमले, क्रूज मिसाइल, स्लीपर सेल तथा ईरान को जिस तरह के हथियारों से युद्ध में सहायता मिल रही है, उसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका के ऊपर खतरा बढ़ गया है। यही वजह है, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने तत्काल रेड अलर्ट जारी करके सुरक्षा इंतजाम में भारी बदलाव किए हैं। इसमें सर्वोपरि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा व्यवस्था है। इसलिए ट्रम्प को सुरक्षा कर्मियों ने बंकर में रहने की सलाह दी है। इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है, अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था, तकनीकी और सैन्य क्षमता कितनी भी अत्याधुनिक और बड़ी क्यों न हो, सुरक्षा के मामलों में अमेरिका हमेशा सतर्क रहता है। ईरान के राष्ट्रपति आयतुल्लाह खामनेई की हत्या के बाद ट्रम्प के लिए खतरा और बढ़ गया है। ईरान की ओर से लगातार धमकी मिल रही है। ईरान बातचीत करने के लिए कहीं से भी तैयार नहीं हो रहा है। ऐसी स्थिति में अमेरिका के राष्ट्रपति को सुरक्षित रखने के लिए बंकर का उपयोग किया जा रहा है। जिस तरह से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान द्वारा निशाने पर लिया जा रहा है। उसको देखते हुए ट्रंप की सुरक्षा अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। अमेरिका में बंकर की व्यवस्था द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पर्ल हार्बर जैसे हमले का मुकाबला करने के लिए आपात स्थिति को ध्यान में रखकर बनाई गई थी, जिसका अब उपयोग होने जा रहा है। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच का यह तनाव वैश्विक राजनीति और सुरक्षा के लिहाज से गंभीर घटना है, जो यह दिखाता है, ईरान के साथ इजरायल और अमेरिका की यह जंग केवल मिसाइल या जेट्स तक सीमित नहीं है। साइबर हमले, ड्रोन स्ट्राइक और आतंकवादी नेटवर्क भी अमेरिका और इजरायल के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं। अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियां किसी भी खुफिया इनपुट को हल्के में नहीं ले रही हैं। उनके लिए राष्ट्रपति की सुरक्षा सर्वोपरि है। सीआईए का यह रेड अलर्ट, राष्ट्रपति ट्रंप को बंकर में सुरक्षित रखने की रणनीति, अमेरिका की सतर्कता और युद्ध के आधुनिक स्वरूप के रूप में मिल रही चुनौती को दर्शाता है। वर्तमान का यह घटनाक्रम साबित करता है, कि वैश्विक राजनीति में हथियार, नवीनतम उपकरणों की शक्ति, खुफिया सुरक्षा तथा अत्याधुनिक रक्षा प्रणाली, संचार माध्यम युद्ध के दौरान बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जिस तरीके से हथियारों में बदलाव आ रहा है। छोटे-छोटे से हथियार बड़े घातक स्वरूप में सामने आ रहे हैं। कम कीमत के छोटे-छोटे हथियार बड़े हथियारों के मुकाबले ज्यादा घातक और बड़े प्रभावी रुप से सामने आये हैं। उसने महाशक्तियों के लिए भी एक नई चुनौती तैयार कर दी है। वर्तमान में युद्ध के दौर में जिस तरह के परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं, उसने दुनिया के सभी देशों में हैरानी पैदा कर दी है। हथियारों और युद्ध के जो परंपरागत स्रोत थे, उनका स्थान अब नवीनतम तकनीकी के हथियार ले रहे है। जो अर्थव्यवस्था में बदलाव का सबसे बड़ा संकेत है। वर्तमान युद्ध ने यह बता दिया है, कि युद्ध ताकत से नहीं जीता जा सकता है। युद्ध जीतने के लिए और भी बहुत सारे उपाय करने होंगे। अन्यथा बड़ी से बड़ी महाशक्ति छोटे-छोटे देश का मुकाबला नहीं कर सकती है। रूस और यूक्रेन के बीच पिछले 4 साल से युद्ध चल रहा है। रूस महाशक्ति होते हुए भी अभी तक यूक्रेन को पराजित नहीं कर पाया है। यह सब नवीनतम तकनीकी के कारण सम्भव हो पाया है। पहली बार अमेरिका को इसका अहसास हो रहा है। ईरान के मामले में यदि अमेरिका और इजरायल ने युद्ध शुरु करने के पूर्व जरा भी गंभीरता बरती होती, तो उन्हें इस तरह का भारी नुकसान नहीं उठाना पड़ता। ईएमएस/15/03/2026