ज़रा हटके
16-Mar-2026
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तेहरान,(ईएमएस)। ईरान में मौजूदा हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं, जहां सैन्य संघर्ष और हमलों की खबरों ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हालिया हमलों में इस्लामिक रिपब्लिक के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु की खबरों के बीच ईरान की सड़कों और सोशल मीडिया पर एक अलग ही मंजर देखने को मिल रहा है। कई स्थानों पर महिलाओं को बिना हिजाब पहने इस बदलाव का स्वागत करते और जश्न मनाते देखा गया है। यह दृश्य उस गहरे असंतोष को बयां करता है जो लंबे समय से वहां की महिलाओं के मन में पनप रहा था। ईरान में महिलाओं ने दशकों तक कठोर सामाजिक और कानूनी नियमों का सामना किया है। इन नियमों के कारण न केवल उनकी स्वतंत्रता बाधित हुई, बल्कि कई प्रतिभाशाली महिलाओं को अपना घर और वतन छोड़कर दूसरे देशों में शरण लेने पर मजबूर होना पड़ा। इन्ही में से एक बड़ा नाम हॉलीवुड अभिनेत्री गोलशिफ्तेह फरहानी का है, जिनकी कहानी ईरान की हजारों महिलाओं के संघर्ष का प्रतिनिधित्व करती है।गोलशिफ्तेह का जन्म 1983 में हुआ था, जब ईरान में इस्लामिक रिपब्लिक की स्थापना को महज चार साल हुए थे। उन्होंने अपना बचपन युद्ध की विभीषिका, बम धमाकों और सायरनों के खौफनाक शोर के बीच बिताया। अभिनेत्री ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि कैसे एक लड़की के तौर पर वहां जीना उनके लिए नामुमकिन जैसा था। उन्होंने खुलासा किया कि बचपन में वह अपने बाल मुंडवा लेती थीं ताकि लड़कों की तरह दिख सकें और बाहर जाकर खेल सकें। अपनी पहचान छिपाकर ही वह साइकिल चलाने जैसा साधारण शौक पूरा कर पाती थीं। फरहानी के लिए सबसे बड़ा मोड़ साल 2008 में आया, जब उन्होंने लियोनार्डो डिकैप्रियो के साथ फिल्म बॉडी ऑफ लाइज में काम किया। इस फिल्म में हिजाब न पहनने के कारण वह कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गईं। दबाव इतना बढ़ गया कि उन्हें अपना देश छोड़कर फ्रांस में बसना पड़ा। आज वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सफल अभिनेत्री हैं, लेकिन उनकी रूह आज भी अपने देश के लोगों के लिए तड़पती है। वीरेंद्र/ईएमएस 16 मार्च 2026